कोरोना संकट के बीच लाइफलाइन साबित हो रहा है मनरेगा जिले में 2 लाख से अधिक श्रमिक मनरेगा में नियोजित
बीकानेर, 10 जून। कोरोना संकट ने आर्थिक अस्थिरता के साथ-साथ हजारों लोगों को घर लौटने को मजबूर कर दिया। एक ओर बीमारी का डर तो दूसरी ओर रोजी की चिंता के बीच अब महात्मा गांधी नरेगा योजना ग्रामीण क्षेत्र में लोगों के लिए लाइफलाइन साबित हो रही है। जिले महात्मा गांधी नरेगा के तहत अब तक 2 लाख से अधिक लोगों को रोजाना रोजगार दिया जा रहा है। जिला कलक्टर कुमार पाल गौतम ने बताया कि कोविड-19 संकट के बीच ग्रामीणों के लिए मनरेगा वरदान साबित हो रही है। वर्तमान में जिले में 2 लाख 7 हजार 317 श्रमिक इसमें नियोजित हैं। प्रत्येक राजस्व गांव में चार कार्यो के प्रस्ताव मंगवाने के लिए दिशा निर्देश दिए गए हैं। समस्त पंचायत समितियों में मनरेगा के तहत कार्य किए जा रहे हैं। वर्तमान में 4 हजार 284 कार्य प्रगतिरत है। मांग के आधार पर अतिरिक्त कार्य स्वीकृत किए जा रहे हैं। गौतम ने बताया कि प्रवासी मजदूरों के जिले में आने के बाद से ही ग्रामीण क्षेत्रों में काम की मांग बढ़ी है। क्वेरंटाइन अवधि पूरी होने के बाद से लोगों को मनरेगा के तहत अधिकाधिक नियोजित किया जा रहा है। अब तक 2 हजार से अधिक नए जाॅब कार्ड बनाए गए हैं।
गौतम ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्र में लोगों को रोजगार मिले और स्थायी प्रकृति की संरचनाएं विकसित हो, वर्षा जल प्रबंधन जैसे कार्य हो जिससे मरूस्थलीय जिले में जल संरक्षण किया जा सके इसके लिए मनरेगा के तहत अधिक से अधिक कार्य करवाए जा रहे हैं।
गौतम ने बताया कि मनरेगा के तहत किसी भी स्तर पर गड़बड़ी ना हो, पात्र को काम मिले और लोगों का आर्थिक संबलन हो इसके लिए निरन्तर प्रयास किया जा रहा है। विकास कार्यो के प्रस्ताव तथा चारागाह विकास कार्य माॅडल तालाब कार्य, श्मशान एवं कब्रिस्तान विकास कार्य, खेल मैदान आदि व्यक्तिगत कार्यो के प्रस्ताव मंगवाये जा रहे है ताकि स्थानीय स्तर पर अधिक से अधिक श्रमिको को रोजगार उपलब्ध करवाया जा सके जिससे श्रमिकों को राहत मिल सके।










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