मिश्रित पशुपालन के विकास को लेकर एनआरसीसी में गहन परिचर्चा आयोजित
बीकानेर 13.12.2021 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र (एनआरसीसी) द्वारा आज दिनांक को ‘शुष्क जलवायु क्षेत्रों में मिश्रित पशुपालन के अवसर और संभावनाएं’ विषयक एक महत्वपूर्ण परिचर्चा का आयोजन किया गया ।
केन्द्र सभागार में आयोजित इस परिचर्चा कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए केन्द्र के निदेशक डॉ.आर्तबन्धु साहू ने किसानों को मिश्रित पशुपालन से अपनी आमदनी बढ़ाने हेतु प्रेरित करते हुए कहा कि बदलते दौर में किसानों की किसी एक पशुधन आधारित पशुपालन व्यवसाय पर निर्भरता कठिन है अंत: एक मिश्रित पशुपालन व्यवस्था के महत्व एवं उपयोगिता को उजागर करने के उद्देश्य से एनआरसीसी द्वारा विषय-विशेषज्ञों के साथ इस गहन परिचर्चा का आयोजन किया गया है।
परिचर्चा में गहन वैचारिक मंथन के उपरांत डॉ.साहू ने मिश्रित पशुपालन व्यवस्था विकसित करने हेतु किसानों के समक्ष ऊँट, भेड़, बकरी एवं खरगोश पालन में संभावित मापदंड रखते हुए उन्हें समूह के रूप में इसे अपनाने का सुझाव दिया ताकि प्रत्येक संबद्ध किसान के हिस्से में एक निर्धारित आमदनी को प्राप्त किया जा सके। आमदनी को दुगना करने हेतु उन्होंने पशुओं के साथ-साथ उनके संबंधित सभी उत्पादों (बायो प्रोडेक्टस) को शामिल किए जाने की बात कही।
परिचर्चा के अवसर पर मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के निदेशक डॉ. ए.के. तोमर ने कहा कि किसान, खेत के साथ मिश्रित पशुपालन को ध्यान में रखते हुए बाजार की मांग आधार पर मार्केट चैन विकसित करें ताकि इससे न केवल उनकी आमदनी बढ़ेगी अपितु रोजगार के अवसर भी उपलब्ध हो सकेंगे। डॉ.तोमर ने कहा कि किसानों द्वारा ऊँट, भेड़, बकरी एवं खरगोश आदि में मिश्रित पशु पालन पद्धति को अपने संसाधन अनुसार अपनाने एवं इसका क्रियान्वयन कर ऐसे सुरक्षित व्यवसाय से आमदनी दोगुना से अधिक प्राप्त की जा सकती है।
उन्होंने किसानों को व्यवसाय में लाभ हेतु मार्केटिंग के तौर-तरीकों, उचित फसल चक्र, व्यवसाय संबंधी अद्यतन जानकारी आदि विभिन्न पहुलओं पर भी अपेक्षित गौर करने की उपयोगी सलाह दी। उन्होंने कहा कि किसान खुले मन से अपनी समस्याओं एवं जिज्ञासाओं को वैज्ञानिकों के समक्ष रखें ताकि उचित समाधान देकर देश के किसान को खुशहाल बनाया जा सके।
विशिष्टि अतिथि के रूप में आयोजित परिचर्चा में वचुर्अल रूप से जुड़े निनफेट के निदेशक डॉ. डी.बी. शाक्यावर ने एनआरसीसी के प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि ऊँट, भेड़, बकरी एवं खरगोश, ऊन उत्पादन की दृष्टि से महत्वपूर्ण है तथा खासकर बीकानेर में ऊन कारीगरों की सुलभता को देखते हुए ऊँट के बालों के प्रसंस्करण एवं संवर्धन पर अपेक्षित ध्यान देते हुए ‘सप्लाई चैन’ विकसित की जानी चाहिए।
डॉ.शाक्यावर ने ऊँट पालकों को ऊँट की ऊन कटाई के दौरान बालों की साफ-सफाई, बालों को रंग एवं गुणवत्ता के आधार पर विभक्त करने, उष्ट्र टोरडियों से प्राप्त बाल आदि का विशेष ख्याल रखने की बात कही ताकि उष्ट्र ऊन से अच्छा बाजार भाव किसानों को मिल सके। उन्होंन अच्छे ऊनी उत्पाद निर्मित करने हेतु किसानों को प्रशिक्षण की आवश्यता जताते हुए इसकी जानकारी दी।
परिचर्चा में सम्माननीय अतिथि के तौर पर वचुर्अल रूप से जुड़े श्री जयदीप श्रीवास्तव, मुख्य महाप्रबंधक, नाबार्ड ने समन्वित पशुपालन व्यवस्था को जिक्र करते हुए कहा कि खेती के साथ पशुपालन को बढ़ावा देने हेतु एनआरसीसी, सीएसडब्ल्युआरआई एवं निनफेट के माध्यम से किसानों को अपेक्षित योजनाओं का लाभ पहुंचाने हेतु नाबार्ड तत्परता से कार्य करेगा।
साथ ही उन्होंने शुष्क क्षेत्र में मिश्रित पशुपालन के लिए संभावनाओं को देखते हुए किसान उत्पादन संगठन के माध्यम से जुड़ने पर लाभ होने की बात कही। इस अवसर पर नाबार्ड का बीकानेर क्षेत्र से प्रतिनिधित्व करते हुए जिला प्रबंधक श्री रमेश ताम्बिया ने संस्था संबंधी विभिन्न महत्वपूर्ण योजनाओं की जानकारियों को किसानों के साथ साझा किया।
परिचर्चा के तहत आयोजित तकनीकी व्याख्यान सत्रों में विषय-विशेषज्ञों के रूप में केन्द्रीय भेड़ एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, बीकानेर के प्रधान वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.एच.के.नरूला ने भेड़ उत्पादन, एनआरसीसी के वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम समन्वयक डॉ.वेद प्रकाश ने ऊँटों से प्राप्त उत्पादन, सीएसडब्ल्युआरआई के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.आर.एस.भट्ट ने खरगोश उत्पादन संबंधी व्याख्यान प्रस्तुत किए जिनमें पशुपालकों की सक्रिय सहभागिता देखी गई।
केन्द्र द्वारा आयोजित इस परिचर्चा में बीकानेर के डाइया, कोटड़ा, नालवड़ी, गोलरी, चानडासर,नाल, कालू, नाथूसर, नकोदेसर, रावांसर आदि के करीब 80 पशुपालकों ने शिरकत की। इस अवसर पर बीकानेर स्थित आईसीएआर संस्थानों के कई वैज्ञानिकों ने भी इस परिचर्चा में भाग लिया साथ ही सीएसडब्ल्युआरआई के डॉ. आशीष चोपड़ा, कार्यक्रम सह समन्वयक ने भी किसानों को संबोधित किया। कार्यक्रम का संचालन केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक डॉ.सुमन्त व्यास ने किया एवं धन्यवाद प्रस्ताव केन्द्र के डॉ.शिरीष नारनवरे, वरिष्ठ वैज्ञानिक एवं कार्यक्रम सह समन्वयक द्वारा ज्ञापित किया गया।




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