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ठाकुर भदोरिया बने बदलाव की मिसाल सब एडिटर सौरभ सैनी की विशेष रिपोर्ट

 

ठाकुर भदोरिया रक्तदान के क्षेत्र में एक ऐतिहासिक नाम है आज उनकी वजह से जब कहीं भी रक्तदान शिविर लगेंगे तो वहां लिखा जाएगा रक्त समर्पण शिविर तथा रक्तदाता को कहा जाएगा रक्त सेवक यह निर्णय इंडिया 0773 द्वारा किया गया समूह काफी उपलब्धियां अपने हिस्से रखता है

 जिसके तहत 26 सालों से यह विभिन्न क्षेत्रों जैसे बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ दुर्घटना में घायल हो या फिर रक्त संरक्षण पर्यावरण सरंक्षण जनहित के सेवा कार्य उन्हीं में प्रसिद्ध हुए संस्था के राष्ट्रीय अध्यक्ष ठाकुर दिनेश सिंह भदोरिया 18 वर्ष की आयु से ही रक्तदान करने लगे थे आज मात्र 57 वर्ष की आयु में 128 बार रक्तदान कर चुके हैं |

और उन्होंने अपनी प्रेरणा से राजस्थान ही नहीं अन्य प्रांतों में भी 700 से अधिक शिविरों के माध्यम से 11000 यूनिट  रक्त समर्पण कर चुके हैं गुमशुदा तलाश केंद्र बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ और सावधान इंडिया 077 की मदद से संपूर्ण भारत में नेटवर्क के माध्यम से विभिन्न क्षेत्रों में समाज हित के कार्य करते हुए अनेकों रिकॉर्ड भी कायम किए हैं 

जिनमें से एक रिकॉर्ड यह है कि 5700 से अधिक लापता लोगों को उनके परिजनों से मिलाया है यह टीम कोरोना काल में भी बहुत  संवेदनशील क्षेत्रों में कार्य करती रही है ऐसे ही एक शिविर में एक बार बोलते हुए राष्ट्रीय अध्यक्ष भदोरिया ने कहा कि रक्तदान अहंकारी शब्द है |
अतः यह सेवा का माध्यम होना चाहिए तथा इसलिए रक्त समर्पण नाम दिया जाए और सभी ने यह अभियान चलाया कि रक्तदान शब्द को हटाकर रक्त सेवा या रक्त समर्पण शिवीर लिखा जाए और उस अपील का परिणाम यह हुआ कि पीबीएम के रक्त कोष प्रांगण में आज रक्त शिविर आयोजन

 किया गया जिससे रक्त समर्पण शिविर नाम दिया गया तथा रक्तदाता शब्द को बदल कर रख सेवक नाम लिखा गया यह समाज में बदलाव के संकेत हैं सिटी एक्सप्रेस उन्हें धन्यवाद देता है कि वह ऐसे उदार कार्य कर रहे हैं |






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