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एनआरसीसी में आधुनिक प्रयोगशाला तकनीकियों पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन

 

बीकानेर 11.03.2022 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर द्वारा डीएसटी के वैज्ञानिक सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व की नीति के तहत प्रायोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण (11 मार्च, 2022) का आयोजन किया गया। ‘आणविक अनुवांशिक विश्‍लेषण के लिए आधुनिक प्रयोगशाला तकनीक प्रशिक्षण’ (रिसेन्‍ट लेबोरेट्री टैक्‍नीक्‍स् फॉर मोलीक्‍युलर जैनेटिक एनेलेसिस) विषयक इस
प्रशिक्षण कार्यक्रम में भारत के 5 विभिन्‍न अनुसंधान संस्‍थानों एवं  विश्‍वविद्यालयों के कुल 15  प्रतिभागियों ने भाग लिया। प्रशिक्षण में प्रशिक्षणार्थियों को आणविक विश्‍लेषण तकनीकियों जैसे डीएनए एवं आरएनए निष्‍कर्षण, पीसीआर आदि बायोटैक्‍नोलॉजिकल टूल्‍स को विस्‍तार से समझाया गया ।  प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए।
प्रशिक्षण के समापन सत्र में मुख्‍य अतिथि के रूप में डॉ.पी.डी.तँवर, स्‍पेशलिस्‍ट (मेडिसिन), सरदार पटेल मेडिकल कॉलेज, बीकानेर ने अपने संबोधन में कहा कि आज के परिवेश में रोग पहचान के लिए उपयोग में लाए जाने वाली पद्धतियां जैसे कि एक्‍सरे, सोनोग्राफी आदि के अलावा नई तकनीकें जैसे एमआरआई सीटी स्‍कैन, रियल टाइम पीसीआर का उपयोग आम बात है। 
प्रशिक्षणार्थियों को प्रोत्‍साहित करते हुए डॉ.तँवर ने कहा कि उन्‍होंने एनआरसीसी में एक सही विषय पर प्रशिक्षण प्राप्‍त किया है तथा भविष्‍य में मोलीक्‍युलर टूल्‍स्, मानव रोगों के डायग्‍नोसिस में मुख्‍य भूमिका अदा करेंगे। उन्‍होंने इस क्षेत्र में मोलीक्‍युलर के उपयोग संबंधित अपने अनुभव भी साझा किए।विशिष्‍ट अतिथि के रूप में डॉ.एस.सी.मेहता, प्रभारी अधिकारी, राष्‍ट्रीय अश्‍व अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर ने कहा कि हमें पशुओं में उत्‍पादन बढ़ाने एवं उनके अनुवांशिक चयन हेतु मोलीक्‍युलर टूल्‍स की अति आवश्‍यकता है, अंत: इन टूल्‍स के बारे में जागरूकता जरूरी है। 
उन्‍होंने प्रतिभागियों को कहा कि प्रशिक्षण के दौरान सीखी गई तकनीकियों को अपनी प्रयोगशाला में दोहराएं तथा इस महत्‍वपूर्ण अनुसंधान संस्‍थान से जुड़े रहें ताकि भविष्‍य में उन्‍हें और अधिक लाभ मिल सके। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने कहा कि यद्यपि यह प्रशिक्षण एक सीमित अवधि का रहा परंतु इसकी उपयोगिता को समझते हुए भविष्‍य में यह अनुसंधान केन्‍द्र, दीर्घ अवधि के प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करना चाहेगा ताकि अनुसंधान कर्ताओं, शोध छात्रों आदि को आणविक अनुवांशिक विश्‍लेषण का लाभ मिल सके । 
उन्‍होंने संस्‍थान के पर्यटनीय महत्‍व पर भी प्रकाश डालते हुए कहा कि प्रशिक्षण के लिए आए प्रतिभागी संस्‍थान के इस आकर्षण का भी लुत्‍फ जरूर उठाएं तथा उष्‍ट्र प्रजाति के महत्‍व को समझें।  इस अवसर पर कार्यक्रम के समन्‍वयक डॉ.बसंती ज्‍योत्‍सना, वरिष्‍ठ वैज्ञानिक द्वारा प्रशिक्षण के उद्देश्‍य एवं महत्‍व पर प्रकाश डाला गया वहीं धन्‍यवाद प्रस्‍ताव, कार्यक्रम सह समन्‍वयक डॉ.वेद प्रकाश,वरिष्‍ठ वैज्ञानिक ने ज्ञापित किया।







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