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एनआरसीसी में जीनोम विश्‍लेषण पर दो दिवसीय कार्यशाला का आयोजन

 

बीकानेर 10.03.2022 । भाकृअनुप-राष्‍ट्रीय उष्‍ट्र अनुसंधान केन्‍द्र, बीकानेर द्वारा डीएसटी के वैज्ञानिक सामाजिक उत्‍तरदायित्‍व की नीति के तहत प्रायोजित दो दिवसीय कार्यशाला (9-10 मार्च, 2022) का आयोजन किया गया। ‘आणविक अनुवांशिक अध्‍ययन और रोगनिदान के लिए जीनोम विश्‍लेषण विधि’ (जीनोम एनेलेसिस मैथड्स फॉर मोल्‍युलर जेनेटिक स्‍टडीज एण्‍ड डिजिज डायग्‍नोसिस) विषयक इस कार्यशाला में राजस्‍थान के 7 विभिन्‍न विश्‍वविद्यालयों एवं अनुसंधान संस्‍थानों के कुल 26 प्रतिभागियों ने भाग लिया। 
इस अवसर पर कार्यशाला की विभिन्‍न विषय वस्‍तुओं पर आधारित प्रशिक्षण कम्‍पेंडियम का विमोचन भी किया गया। कार्यशाला में डीएनए, आरएनए आदि को विभिन्‍न प्रकार के नमूनों से निकालने की विधि तथा पीसीआर तकनीक द्वारा विभिन्‍न रोगों की पहचान तथा जैव विविधता का अध्‍ययन पर व्‍यावहारिक प्रशिक्षण दिया गया।  प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र भी वितरित किए गए। 
कार्यशाला के प्रथम दिवस के मुख्‍य अतिथि के रूप में डॉ.ए.के.रावत, एडवायजर, जैव प्रौद्योगिकी विभाग, भारत सरकार ने अपने संबोधन में कहा कि जीनोम विश्‍लेषण के क्षेत्र में अत्‍यधिक संभावनाएं विद्यमान हैं। उन्‍होंने भारत सरकार द्वारा जैव प्रौद्योगिकी विभाग की विभिन्‍न योजनाओं आदि की जानकारी देते हुए वैज्ञानिकों को अवगत कराया कि वे अपने अनुसंधान प्रस्‍तावों के लिए वित्‍तीय सहायता प्राप्‍त कर सकते हैं 
साथ ही उन्‍होंने इस अनुसंधान कार्यक्षेत्र में दिए जाने वाले विभिन्‍न फेलोशिप की भी जानकारी दी। इस दौरान उन्‍होंने इस क्षेत्र में अपने अनुभव साझा किए। कार्यशाला के समापन के अवसर पर मुख्‍य अतिथि के रूप में डॉ.वी.के.सक्‍सेना, एडीजी (एपीएण्‍डबी), भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद, नई दिल्‍ली ने कहा कि जीनोम की विविधता का अध्‍ययन करके हम नस्‍लों की पहचान तथा होने वाले विभिन्‍न्न रोगों का निदान तथा उत्‍पादकता वृद्धि हेतु जैनेटिक मार्कर की खोज कर सकते हैं।
 मुख्‍य अतिथि ने अपने उद्बोधन में प्राचीन प्रसंगों का हवाला देते हुए कहा कि हमें अच्‍छे विचारों को कभी भी रोकना नहीं चाहिए जबकि गलत विचार को ही रोका जाना चाहिए, इसी दृष्टिकोण से ही विज्ञान को समझते हुए उसका सदुपयोग मानव कल्‍याण हेतु करना चाहिए। कार्यक्रम की अध्‍यक्षता करते हुए केन्‍द्र निदेशक डॉ.आर्तबन्‍धु साहू ने कहा कि ऊँट अनुसंधान के क्षेत्र में खासकर ऊँटनी के दूध के औषधीय गुणधर्मों पर अनुसंधान की असीम संभावनाएं हैं।
उन्‍होंने इस तरह की कार्यशाला के महत्‍व पर जोर देते हुए कहा कि यह केन्‍द्र, भविष्‍य में दीर्घ अवधि की विविध विषय वर्गीय महत्‍वपूर्ण कार्यशालाओं आदि का आयोजन करेगा। उन्‍होंने कहा कि कि विज्ञान में बुद्धि के साथ-साथ जुनून से कार्य करके बड़ी से बड़ी अनुसुलझी चुनौतियों को सुलझाया जा सकता है, 
नवीन वैज्ञानिक कार्यशालाओं के आयोजन से विभिन्‍न संस्‍थानों एवं विषयों पर काम करने वाले वैज्ञानिकों के मध्‍य वैज्ञानिक विचारों का आदान प्रदान होता है। डॉ.साहू ने कहा कि जीन आधारित तकनीकों का उपयोग,  चाहे वह पशु विज्ञान हो अथवा मानव विज्ञान या वनस्‍पति से जुड़ा हो, अंत: इस विषय पर कार्यशाला का आयोजन महत्‍व रखता है। 
इस अवसर पर केन्‍द्र के कार्यक्रम समन्‍वयक डॉ.वेद प्रकाश, वरिष्‍ठ वैज्ञानिक द्वारा कार्यशाला के उद्देश्‍य एवं महत्‍व पर प्रकाश डाला गया वहीं धन्‍यवाद प्रस्‍ताव इस कार्यक्रम की सह समन्‍वयक डॉ.बसंती ज्‍योत्‍सना, वैज्ञानिक ने ज्ञापित किया।

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