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ग्रान्धी गाँव में बीमार ऊँटों की सुध लेने पहुँचा एनआरसीसी दल

बीकानेर 11 जुलाई 2022 l हाल ही में ग्रान्धी गांव मे ऊँटों के टोले की बीमारी संबंधी प्रकाशित समाचार सूचना के आधार पर भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एनआरसीसी) के वैज्ञानिकों का दल आज ऊँटों की सुध लेने ग्रान्धी गांव पहुंचा.
 एनआरसीसी के दल में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आर.के.सांवल ने बताया कि ग्रान्धी गांव के ज्ञानाराम के इस टोले से लगभग 110 के करीब ऊँटों की जांच की गई तथा इनके खून एवं मिंगनी के नमूने एकत्रित किए गए. इस दौरान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. शांतनु रक्षित ने पशु उत्पादन, स्वास्थ्य व स्वच्छता, पोषण आदि विभिन्न पहलुओं की पशुपालक को
 जानकारी होना अपेक्षित बताया. वहीं केंद्र के डॉ. काशीनाथ, पशु चिकित्सा अधिकारी ने बताया कि इस टोले में तिबरसा रोग के बचाव हेतु टीकाकरण भी किया गया. कमजोर जानवरों को पेट की दवा तथा बाह्य परजीवी चीचड़ से बचाव हेतु परजीवी नाशक दवा व मिनरल मिक्सचर वितरित किया गया.
एनआरसीसी के निदेशक डॉ. आर्तबंधु साहू ने दल से दूरभाष पर संपर्क कर स्पष्ट जानकारी लेते हुए बताया कि केंद्र, उष्ट्र विकास व संरक्षण हेतु प्रतिबद्ध है. प्रकाशित समाचार और उरमूल सीमांत संस्था बज्जू से संपर्क कर इस दल को तुरंत वहां भेजा गया तथा जांच हेतु बीमार ऊँटों की सेंपलिंग की गई है। 
उन्होंने कहा कि प्रदेश में पशुधन आधारित आजीविका को देखते हुए पशुओं के स्वास्थ्य से जुड़ी ऐसी आपात स्थिति को प्रमुखता से लिया जाता है. 
केंद्र समय-समय पर पशु स्वास्थ्य शिविर आदि के माध्यम से ऊँटों के स्वास्थ्य व श्रेष्ठ प्रबंधन के अलावा इस प्रजाति के दूध के औषधीय महत्त्व व पर्यटनीय संभावनाओं की ओर ध्यान आकर्षित किया जाता है ताकि बदलते दौर में ऊँट को एक उद्यम के रूप में अपनाकर ऊँट पालक भाई अपनी आजीविका आराम से चला सकें। 
 उरमूल सीमांत संस्था बज्जू के मोतीलाल व केंद्र के दल में शामिल अमित कुमार द्वारा ऊँटों की सैंपलिंग आदि कार्यों में सहायता प्रदान की गई. 
एनआरसीसी के इस दल के प्रति ऊँटों के टोले के स्वामी ज्ञानाराम ने आभार व्यक्त किया व आशा जताई कि उनके बीमार पशुओं को शीघ्र स्वास्थ्य लाभ मिल सकेगा.

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