एनआरसीसी ने खींचिया में किया पशु शिविर व कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन
बीकानेर 20 जुलाई 2022 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र (एन.आर.सी.सी.) द्वारा अनुसूचित जाति उपयोजना (एससीएसपी) के तहत आज जामसर के पास गांव खींचिया में पशु स्वास्थ्य शिविर एवं कृषक-वैज्ञानिक परिचर्चा का आयोजन किया गया जिसमें खींचिया एवं आस-पास क्षेत्र के 46 पशुपालकों एवं किसानों ने 197 पशुओं सहित (जिनमें गाय-95, भैंस-14, भेड़-12 व बकरी-76 शामिल) केन्द्र के इस कार्यक्रम में अपनी सक्रिय सहभागिता निभाई।
परिचर्चा में केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने पशुपालकों को संबोधित करते हुए कहा कि अनुसूचित जाति उपयोजना के तहत भारत सरकार अनुसूचित जाति के कल्याणार्थ देश के ग्रामीण अंचलों में जरूरतमंदों को बुनियादी सुविधाओं की पूर्ति कर उन्हें समाजार्थिक दृष्टिकोण से खुशहाल बनाने हेतु सतत प्रयत्नशील हैं।
डॉ.साहू ने वर्तमान में चल रही लम्पी स्किन डीजिज में पशुओं के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि पशुपालक, सावधानी बरतते हुए इस बीमारी से अपने पशुओं का बचाव कर सकते हैं, बचाव ही इसका श्रेष्ठ उपाय है। उन्होंने उत्तम पशु आहार के माध्यम से पशुओं में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाते हुए इस बीमारी से उभरने में सहायता मिलने की बात कही। डॉ. साहू ने कहा कि बदलते दौर में पशुधन व्यवसाय संबंधी परंपरागत ज्ञान के साथ-साथ अद्यतन जानकारी किसान के पास होने पर वे श्रेष्ठ उत्पादन द्वारा अपनी आजीविका को और अधिक बेहतर ढंग से चला सकेंगे।
डॉ.साहू ने केन्द्र द्वारा ऊँट विकास एवं संरक्षण हेतु किए जा रहे नूतन आयामों एवं प्रसार गतिविधियों की जानकारी देते हुए पशुपालकों को एन.आर.सी.सी. के भ्रमण एवं प्रशिक्षण हेतु भी विशेष रूप से प्रोत्साहित किया।
भाकृअनुप-एन.आर.सी.सी. में चल रही इस एससीएसपी उप-योजना के नोडल अधिकारी डॉ.आर.के.सावल, प्रधान वैज्ञानिक ने कहा कि कार्यक्रम में पशुपालकों के साथ पशुपालन व्यवसाय सम्बन्धी विभिन्न पहलुओं एवं समस्याओं पर खुलकर चर्चा की गई। साथ ही पशुओं के लिए आहार चारे के रूप में पौष्टिक नेपियर घास के बारे में भी जानकारी देते हुए इस घास के पशुपालकों को सैम्पल बांटे गए।
साथ ही केन्द्र में निर्मित पशुओं के पौष्टिक आहार (संतुलित पशु आहार) व खनिज मिश्रण का भी वितरण किया गया।
इस दौरान केन्द्र के वैज्ञानिक डॉ. शान्तनु रक्षित, वैज्ञानिक ने पशुओं की शारीरिक क्रियाओं एवं विद्यमान क्षमताओं के संबंध में कहा कि पशुओं की धीमी शारीरिक वृद्धि एवं कम दुग्ध-उत्पादन क्षमता की ओर पशुपालकों द्वारा विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
वहीं पशु चिकित्सा अधिकारी डॉ.काशी नाथ एवं डॉ. सुमनिल ने शिविर में लाए गए पशुओं की स्वास्थ्य स्थिति के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि पशुओं में ज्यादात्तर चींचड़, भूख कम लगना, पेट में कीड़े पड़ने आदि रोग देखे गए जिनके उपचार हेतु पशुओं को दवा दी गई तथा उचित समाधान बताया गया।
खींचिया गांव के श्री केशुराम, वार्ड मेम्बर ने भारत सरकार की इस योजना के महत्व का जिक्र करते हुए इसके सफल क्रियान्वयन में एनआरसीसी की सक्रियता को सराहा। इस पशु स्वास्थ्य कैम्प में केन्द्र के श्री मनजीत सिंह, वरिष्ठ तकनीकी अधिकारी ने पशुपालकों के पंजीयन, उपचार, दवा व पशु आहार वितरण जैसे विभिन्न कार्यों में सक्रिय सहयोग प्रदान किया गया।




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