केन्द्रीय भेड एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, मर क्षेत्रीय परिसर, बीकानेर में अनूसूचित जातियोजना के अन्तर्गत तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यकम का उदघाटन
बीकानेर।अनुसूचित जाति उपयोजना के अंतर्गत मरु क्षेत्रीय परिसर बीकानेर में “समन्वित भेड पालन एवं लंपी स्किन रोग की रोकथाम एवं बचाव” विषय पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यकम किया गया जिसमें मुख्य अतिथि के रुप राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के निदेशक डॉ. आर्तबंधु साहु तथा विशिष्ट अतिथि के रुप मे केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान के निदेशक डॉ डी.के.समाधिया सम्मिलित हुए।
कार्यक्रम की अध्यक्षता केन्द्रीय भेड एवं ऊन अनुसंधान संस्थान, अविकानगर के निदेशक डॉ. अरुण कमार तोमर ने की। मर क्षेत्रीय परिसर, बीकानेर पालन एवं उत्पादों के बारे में जानकारी दी एवं भेड़ पालन में उचित पोषण प्रबंधन एवं पशु
पोषण के महत्व को समझाया। डॉ समादिया ने भेड पालन में एकीकृत कृषि एवं वैज्ञानिक प्रबंधन के महत्व पर प्रकाश डाला। इस प्रशिक्षण कार्यक्रम मे बाडमेर जिले के अनुसुचित
जाति के 40 किसानों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
उक्त कार्यक्रम मे डॉ आशीष चौपडा, डॉ विनोद कदम, डॉ अशोक कुमार, डॉ बाबुलाल जाट तथा डॉ रंणजीत गोदारा आदि वैज्ञानिक ने अपने विचारो द्वारा किसानो को लाभान्वित किया | इस अवसर पर संस्थान परिसर में किसानों तथा अतिथियों द्वारा पौधारोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संकल्प लिया गया।
उक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम के अन्तर्गत लम्पी रोग के लक्षण, रोकथाम एवं बचाव तथा वैज्ञानिक भेडपालन की उन्नत तकनीकों बारे में जानकारी दी गई | साथ ही किसानों को राष्ट्रीय उष्टर अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर , राष्ट्रीय अश्व अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर, एवं केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान, बीकानेर संस्थानो का भ्रमण भी करवाया गया।
कार्यक्रम के अन्त में किसानों को दैनिक जीवन में उपयोग के लिए पानी की बोतल, टार्च एवं पौधे आदि का भी वितरण किया गया।




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