एनआरसीसी द्वारा ऊंटों की बहुआयामी उपयोगिता को पतंजलि के माध्यम से आगे लाने की कवायद।
बीकानेर 22 अक्टूबर 2022 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसन्धान केन्द्र में आज दिनांक को पतंजलि योगपीठ हरिद्वार के एक दल द्वारा भ्रमण किया गया। इस दल में पतंजलि सन्यास प्रकल्प के बंगाल, उड़ीसा, बिहार, मद्रास के 95 सन्यासी, आचार्य व ब्रह्मचारी सम्मिलित थे जिन्हें एनआरसीसी के अधिदेशों तहत अनुसंधान कार्यों की विस्तृत जानकारी दी गई
एवं उष्ट्र संबद्ध गतिविधियों यथा-उष्ट्र डेयरी, कैमल मिल्क पॉर्लर, उष्ट्र बाड़ों तथा उष्ट्र पर्यटनीय सुविधाओं में उष्ट्र संग्रहालय, उष्ट्र सफारी आदि प्रमुख स्थलों का भ्रमण करवाते हुए इनकी व्यावहारिक जानकारी दी गई।इस अवसर पर केन्द्र निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने उष्ट्र प्रजाति की बहुआयामी उपयोगिता पर अपनी बात रखते हुए कहा कि केन्द्र में अनुसन्धान द्वारा ऊँटनी का दूध विभिन्न मानवीय रोगों यथा- मधुमेह, क्षय रोग व ऑटिज्म के प्रबंधन में कारगर पाया गया है।
यह दूध एलर्जी नहीं करता एवं इसमें महत्वपूर्ण रोग प्रतिरोधकता क्षमता को देखते हुए इस पशु को ‘औषधि का भण्डार’ कहा जा सकता है। उन्होंने केन्द्र द्वारा ऊँटनी के दूध से विकसित विभिन्न स्वादिष्ट मूल्य सवंर्धित उत्पादों की जानकारी देते हुए ऊँटनी के दूध के औषधीय महत्व के आधार पर इसके प्रति जागरूकता व उत्पादन बढ़ाने, इसका बाजारभाव तय करने की आवश्यकता जताई वहीं उन्होंने उष्ट्र पर्यटन विकास के तहत उष्ट्र बाल (ऊन),
चमड़ी, हड्डी आदि से जुड़े कुटीर उद्योगों को उष्ट्र पालकों के लिए आमदनी का महत्वपूर्ण जरिया बताते हुए उष्ट्र विकास एवं संरक्षण हेतु पतंजलि योगपीठ के माध्यम से ऊँटों की बहुआयामी उपयोगिता को आमजन के कल्याणार्थ आगे बढ़ाने की अपनी मंशा जाहिर की।
पतंजलि दल ने ऊँटनी के दूध का सामान्य ताप पर जीवन, दूध में विद्यमान औषधीय गुणधर्मों, इसके प्रसंस्करण, रखरखाव, ऊँटों की बदलते परिवेश में उपयोगिता आदि पहलुओं पर अपनी जिज्ञासाएं रखीं जिनका वैज्ञानिकों द्वारा उचित निराकरण किया गया। वहीं केन्द्र के डॉ. राकेश रंजन, प्रधान वैज्ञानिक द्वारा दल के भ्रमण के दौरान व्यावहारिक जानकारी दी गई।
पतंजलि के दल प्रतिनिधि स्वामी (डॉ.) परमार्थ देव, श्री अरविन्द पांडेय, राजस्थान पूर्व प्रमुख, राजस्थान पश्चिम प्रमुख श्री विनोद पारीक, राज्य प्रमुख (पूर्व) युवा भारत के श्री संदीप कासनिया आदि ने राजकीय पशु ‘ऊँट‘ का भलीभांति प्रबंधन एवं इस व्यवसाय को लाभदायक बनाते हुए इनकी संख्या बढ़ोत्तरी के संबंध में अपने विचार रखें।











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