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अब स्कूलों में भी बच्चे खेलेंगे शह मात का खेल,अंतर कॉलेज प्रतियोगिता का आगाज


बीकानेर। श्री नेहरू शारदा पीठ पीजी महाविद्यालय बीकानेर में, महाराजा गंगासिंह विश्वविद्यालय द्वारा आयोजित महिला एवं पुरुष वर्ग अंतर महाविद्यालय शतरंज प्रतियोगिता का शुभारंभ अतिथियों द्वारा किया गया।
इस अवसर मुख्य अतिथि के रूप में बोलते हुए सम्भागीय आयुक्त नीरज के पवनने कहा कि राजस्थान एकमात्र ऐसा राज्य है जहां स्कूली शिक्षा में शतरंज का खेल अनिवार्य रूप से लागू किया गया है। हर स्कूल में शतरंज का खेल खेलना अनिवार्य होगा। इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा,सोचने एवं निर्णय लेने की क्षमता बढ़ेगी।
विशिष्ठ अतिथि अन्तरर्राष्ट्रीय शतरंज खिलाड़ी एवं कोच शंकरलाल हर्ष ने कहा कि सभी महाविद्यालय और विद्यालयों में छात्रों को शतरंज की अच्छे से ट्रेनिंग देनी चाहिए और इस प्रयोजन में संभाग के आयुक्त द्वारा दिए गए आदेश आदेश से शतरंज को एक नया आयाम मिलेगा। शतरंज खेल नहीं एक जीवन भी है जिसमें आदमी को अपने तरीके से जीने का सलीका आता है।
अध्यक्ष उद्बोधन देते हुए चेयरमैन स्थाई लोक अदालत बीकानेर के महेश शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार द्वारा स्कूल स्तर पर शतरंज खेल लागू करना एक सराहनीय कदम है, बीकानेर शतरंज एसोसिएशन हमेशा खिलाडिय़ों के सहयोग के लिए तैयार है। इस पूर्व अतिथियों का शब्दाभिषेक करते हुए प्राचार्य डॉ प्रशांत बिस्सा ने कहा कि संभागीय आयुक्त द्वारा शतरंज प्रतियोगिता के लिए जो भाव प्रकट किये है
उस आधार पर हम श्री नेहरू शारदा पीठ महाविद्यालय में सप्ताह में 2 दिन शतरंज के कक्षाएं प्रारंभ करेंगे जिसमें शंकरलाल हर्ष और उनके सभी सहयोगियों के सहयोग से महाविद्यालय के छात्रों को शतरंज खेलना सिखाएंगे साथ ही विश्वास दिलाता हूं कि विश्वविद्यालय और अन्य किसी भी प्रतियोगिता के लिए टीम तैयार करेंगे। डॉ मुकेश किराडू ने अतिथियों को साफा पहनाकर स्वागत किया।
इस आयोजन में राजस्थानी भाषा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सचिव शरद केवलिया,डॉ.मुकेश,राजेश पुरोहित,डॉ.गोपाल व्यास,राजकुमार,श्रीमती नीतु बिस्सा,डॉ मनीषा गांधी,हेमा पारीक सुलोचना ओझा, डॉ पुनम वाधवानी, कुसुम पारीक, मुकेश पुरोहित,अरविंद स्वामी,अमित पारीक, गोर्वधन भादाणी,
कमल आचार्य आदि ने अतिथियों का माला एवं साफा पहना कर स्वागत किया। इस पर डॉ गौरीशंकर प्रजापत ने सभी अतिथियों एवं बाहर से पधारे खेल प्रभारियों एवं खिलाडिय़ों का धन्यवाद ज्ञापित किया। संचालन डॉ समीक्षा व्यास ने किया।

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