स्वामी समानन्दगिरिजी का हुआ नागरिक अभिनन्दन)समभाव रहकर कर्म करने से होती है लक्ष्य की प्राप्ति - स्वामी समानन्दगिरिजी।
बीकानेर, 30 अप्रैल, 2023। ब्रह्मलीन पूज्य स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज के शिष्य आध्यात्मिक प्रेरक एवं श्रीसप्तमातृका नार्मदीय वेद सेवा मठ, महेश्वर (म.प्र.) के महन्त स्वामी समानन्दगिरिजी महाराज द्वारा 3500 कि.मी. की ‘माँ नर्मदा पैदल परिक्रमा’ 140 दिनों में निर्विघ्न सम्पन्न करने पर श्रीमती शशिबाला मित्तल स्मृति चेरिटेबल ट्रस्ट, शिव मन्दिर प्रन्यास ट्रस्ट, श्रीकरणी नगर विकास एवं सतर्कता समिति, वल्लभ गॉर्डन विकास मंच, टीम वन्देमातरम्, विनायक शूटिंग स्पोटर््स एकेडमी, मानव प्रबोधन प्रन्यास के पदाधिकारियों तथा गणमान्यजनों द्वारा नागरिक अभिनन्दन किया गया। श्रीमती शशिबाला मित्तल स्मृति चेरिटेबल ट्रस्ट के संस्थापक ट्रस्टी विवेक मित्तल ने बताया कि समारोह का शुभारम्भ श्रीहुनमान जी के चित्र पर माल्यार्पण, दीप प्रज्जवलन व सामूहिक श्रीहनुमान चालीसा के पाठ तथा परिक्रमा के दौरान विभिन्न पड़ावों के चित्रों तथा पूज्य स्वामी संवित् सोमगिरिजी महाराज के गीता के प्रेरक विचारों के बैनर्स की प्रदर्शनी का अवलोकन करके हुआ। श्रीमती दया सारवाल एवं श्रीमती वन्दना सारवाल ने गुरु भजन प्रस्तुत किये। इस अवसर पर श्रीलालेश्वर महादेव मन्दिर, शिवमठ, शिवबाड़ी के महन्त, स्वामी विमर्शानन्दगिरिजी का भी सान्निध्य प्राप्त हुआ। जिन्होंनेे सर्वप्रथम स्वामी समानन्दगिरिजी को शॉल ओढ़ा कर व माल्यार्पण कर अभिनन्दन किया।
माँ नर्मदा पैदल परिक्रमा के अनुभव और समर्पण और सफलता विषय पर अपने उद्बोधन में स्वामी समानन्दगिरिजी ने कहा कि जीवन में निर्धारित लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए आवश्यक है सम भाव यानि प्रतिकुल और अनुकूल परिस्थितियों में संयमित रहकर आगे बढ़ना। बिना समर्पण के न तो ईश्वर की प्राप्ति होती है और न ही जीवन में सफलता। यदि हम ईश्वर को, परम तत्व को या निर्धारित लक्ष्य प्राप्ति में सफल होना चाहते हैं तो जीवन में तप, त्याग, तपस्या और समर्पण का भाव रख कर कार्य करना होगा। कन्हैया लाल पंवार ने बताया कि अभिनन्दन समारोह एवं संवित् विमर्श सत्र में सुरेश मित्तल, नलिन सारवाल, हरनारायण खत्री, दिनेश मित्तल, राजेन्द्र गर्ग, चन्द्रशेखर, समुद्रसिंह, राकेश शर्मा, रामचन्द्र मुलू, श्रीमती मंजुलता शर्मा, श्रीमती दया सारवाल, शिवनाम सिंह, विजय कोचर, विरेन्द्र चौधरी, साकेत शर्मा, मनोज सोनी, एम.के. गुप्ता, बी.जी. व्यास, भवानी शंकर, बजरंगलाल, भगवती प्रसाद पारीक, दयाशंकर तिवाड़ी, डॉ. अभय सिंह टाक, राजीव मित्तल, जितेन्द्र सिंह, किशन सिंह, रवि भल्ला, राजूराम, श्याम सारडा, श्याम सुन्दर, मुकेश जोशी, प्यारेलाल, शैलेश, सहित अनेक साधक, शिक्षक, विद्यार्थी, खिलाड़ी और गणमान्यजन उपस्थित रहे।




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