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*बुद्ध विधवाओं, दिव्यांग पूर्व सैनिकों और पूर्व सैनिकों से सम्बन्धित मांगों का ज्ञापन।


बीकानेर।राष्ट्र-रक्षा को समर्पित पूर्व सैनिक वर्ग से जुड़ी विभिन्न समस्याओं के समाधान हेतु हम लम्बे समय से सरकार का ध्यान आकर्षित कर रहे हैं, समय-समय पर मांग-पत्र प्रस्तुत किये गए हैं और इसी क्रम में दिनांक २० फरवरी २०२३ से दिल्ली के जंतर-मंतर पर लाखों पूर्व सैनिकों और वीर नारियों द्वारा अनिश्चितकालीन धरने द्वारा ध्यानाकर्षण के अनुशासित प्रयास जारी हैं। पिछले ७० दिनों से धरने में पंजाब, हरियाणा, जे. एंड के., हिमाचल प्रदेश, यू.पी., उत्तराखंड, एम्. पी., मणिपुर और राजस्थान के हजारों पूर्व सैनिक और वीर- नारियां उपस्थित हो कर अपना आक्रोश व्यक्त कर चुके हैं।०३ अप्रैल २०२३ को देश के सभी जिलाधीशों के माध्यम से आप को ज्ञापन भिजवाए गए हैं। परन्तु यह अफ़सोस की बात है कि सरकार द्वारा किसी भी स्तर पर हमारी मांगों का संज्ञान नहीं लिया जा रहा, जिस से लाखों पूर्व सैनिक परिवार निराश और मायूस हैं।मान्यवर, हम निम्न लिखित मांगों के शीघ्र समाधान हेतु सादर निवेदन करते हैं :१. समान रेंक समान पेंशन (OROP) की विसंगतियों का निवारण: सन 1973 तक जे.सी. ओ. और जवानों को बलपूर्वक कम सेवा अवधि व् उम्र में रिटायर करने की बाध्यता के कारण उन की पेंशन का निर्धारण वेतन का ७५% हुआ करता था, जिसे घटा कर ५०% कर यह आश्वासन दिया गया था कि समान रेंक समान पेंशन (OROP) के माध्यम से इस की क्षतिपूर्ती सरकार द्वारा कर दी जाएगी। सरकार ने समान रेंक समान पेंशन (OROP) जुलाई २०१४ से स्वीकृत की, पर इसका सही निर्धारण नहीं होने से जे.सी. ओ., जवानों को नाम मात्र का लाभ मिला और सरकार द्वारा स्वीकृत बजट का बड़ा हिस्सा सेना के उन ३% रिटायर्ड अधिकारियों की जेब में चला गया, जो इस के हकदार ही नहीं थे, क्योंकि आजादी के बाद से ही उनको तो वेतन की ५०% पेंशन प्राप्त होती आई है और आज भी वे ५५,५७ वर्ष से अधिक की आयु में उच्च वेतन राशी के ५०% की उच्च पेंशन प्राप्त कर रहे हैं।समान रेंक समान पेंशन (OROP) का निर्धारण सही नहीं होने का कारण: निर्धारण NOTIONAL MAXIMUM OF SCALE OF THE RANKS & GROUP के आधार पर नहीं कर वर्ष २०१३ में रिटायर हुए जे.सी. ओ. व जवानों की पेंशन का MAXIMUM और MINIMUM के औसत के आधार पर किया जाना रहा है, जिस से विसंगतियां उत्पन्न हुई है!
अनियमितता व् भेदभाव नीचे दी गयी तालिका से अधिकारियों और गैर-अधिकारियों की ओ.आर.ओ.पी. (OROP - 1) में प्रतिशत बढ़ोतरी से साफ़ प्रकट होती है :उपरोक्त सारणी में मानद लेफ्टिनेंट और मानद कप्तान की वृद्धि चालाकी से समान ही रखी गयी क्यों कि टाइम स्केल प्रमोशन पालिसी के बाद कोई भी अधिकारी लेफ्टिनेंट कर्नल से नीचे के रैंक से रिटायर ही नहीं होगा !
पुनः समान रेंक समान पेंशन (OROP) द्वितीय जो जुलाई २०१९ से लागू की गयी इस में तो सातवें वेतन आयोग द्वारा वेतन और पेंशन का निर्धारण गलत पे मेट्रिक्स लेवल अपनाने से कुछ रेंक्स की पेंशन ही कम करदी गयी है ! ऐसा तो आज तक नहीं हुआ कि नया रिटायर होने वाला पुराने रिटायर हुए व्यक्ति से कम पेंशन ले रहा है!२. मिलिट्री सर्विस पे (Military Service Pay) से उपजा भेदभाव और अन्याय : यह तो सर्व मान्य है कि मिलिट्री सर्विस पे सैन्य सेवा की कठिनाइयों और जोखिम के आधार पर स्वीकृत की गयी है, पर इस के निर्धारण में कठिनाइयों और जोखिम के आधार को बिलकुल अनदेखा कर ३% अधिकारियों को १५५००/- रुपये प्रति माह और जिन ९७% जे.सी. ओ. व जवानों को सबसे अधिक कठिनाई और जोखिम है उनको ५२००/- रुपये मिलिट्री सर्विस पे का निर्धारण कर बहुत बड़ा अन्याय किया गया है ! इस का सीधा प्रभाव पेंशन निर्धारण पर होने से अधिसंख्य पूर्व सैनिकों का शोषण हुआ है। सेना की कठिनाइयों और जोखिम की जानकारी रखने वाले विशेषज्ञों (सैन्य- अधिकारियों के अलावा) के दल से सर्वे कराया जाये तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जायेगा और वास्तविकता सामने आने पर जिन्हों ने इस का निर्धारण किया है, शर्म से उनके सिर नीचे झुक जायेंगे ! सेना में सबसे अधिक जोखिम और कठिनाई जवानों को है, उस से कुछ कम जे.सी. ओ. को है और अधिकारियों को तो ना के बराबर है, वे पूरी सुख-सुविधा के साथ सेवा का आनंद लेते हैं!
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३. डिसेबिलिटी पेंशन (DISABILITY PENSION) में भेदभाव व विसंगति :

यह एक कठोर सच है कि हर इंसान को अपने शरीर का अंग जरुरी और प्यारा होता है तो फिर अधिकारी और गैर अधिकारी की डिसेबिलिटी पेंशन में अंतर क्यों ? See the difference in Normal rate of disability pension

2006 से

प्रभावी जुलाई 2019

श्रेणी ओआरएस/जेसीओएस

अधिकारियों

3510/- 5880/-

% बढ़ोतरी

9000/- 75000/- 1175%

156%

इसी तरह War injury disability & War injury invalid out pension में भी अप्रत्याशित भेदभाव कर दिया गया है! सातवें वेतन आयोग ने तो जवान जे.सी.ओ. और अधिकारियों के लिए क्रमशः 12000/- 17000/- और 27000/- की सिफारिश की थी लेकिन अधिकारियों ने मोटा माल मारने के लिए अनामली कमिटी के मार्फ़त अपने हित में बदलाव करवा लिया और यही कारण है कि सी.ए.जी. की रिपोर्ट अनुसार आज ४०% से अधिक अधिकारी डिसेबिलिटी पेंशन के साथ रिटायर होने का जुगाड़ बैठा कर मोटी राशी हड़प रहे हैं। प्रार्थना है कि डिसेबिलिटी पेंशन को बिना रैंक आधारित भेद्भाव के युक्तिसंगत स्तर पर लागू किया जाये !

४. रिजर्विस्ट पेंशनर्स को ओ.आर.ओ. पी. नहीं देना गंभीर शोषण : यह सच्चाई है कि एक नियमित सैनिक के बजाय एक रिजर्विस्ट देश के प्रति ज्यादा समर्पित रहा है !

सेना द्वारा रिज़र्व फ़ोर्स रखने और सरकार का पैसा बचाने के लिए जबरन सैनिकों को रिजर्विस्ट के तौर पर घर भेजा गया और यह शर्त भी लादी गयी कि प्रति वर्ष एक माह की ट्रेनिंग के लिए और युद्ध की स्थिति में मोर्चे पर उपस्थित होना अनिवार्य होगा! ना तो वह स्थायी नौकरी के लिए स्वतंत्र रहा और ना ही कोई अपना व्यवसाय स्थापित करने की स्थति में रहा एवं जब भी सेना और देश ने युद्ध के लिए बुलाया तो सब कुछ जीवन यापन के साधन को छोड़ कर मोर्चे पर पहुंचा। ऐसे बहुत कम संख्या में जीवित समर्पित व त्यागी रिजर्विस्ट सैनिकों को ओ. आर. ओ. पी. नहीं देना एक बड़ा अन्याय और उनकी सेवा का उपहास है। तत्काल उन्हें ओ. आर. ओ. पी. देने की प्रार्थना है।

५. ग्रुप X के सैनिकों की पेंशन में विसंगति :

सातवें वेतन आयोग की सिफारिश के बाद २०१६ से पूर्व के एक्स ग्रुप की पेंशन पाने वाले पूर्व सैनिकों की पेंशन में कमी हो गयी है जो न्यायसंगत नहीं कही जा सकती, इसके सुधार किये जाने की प्रार्थना है ! ऐसा ६२००/- ग्रुप एक्स पे को पुरानों के लिए ३६००/- ग्रुप पे में सम्मिलित करने से हुआ जिसे सही करवाया जाये!

६. बिना आर्थिक लाभ के मानद पद देने का औचित्य क्या ? गैर-अधिकारी वर्ग के कुछ पदों के सैनिकों को रिटायरमेंट के पश्चात् मानद पद दिए जाते हैं पर उन्हें किसी भी प्रकार का मौद्रिक लाभ नहीं दिया जाता निवेदन है कि सभी मानद पद धारी सैनिकों को मौद्रिक लाभ स्वीकृत किये जाएँ !

७. प्री-मेच्योर रिटायर होने वाले सैनिकों को ओ.आर.ओ.पी. :

कोई भी सैनिक अपने टर्म्स आफ एंगेजमेंट के बाद रिटायर होता है तो ही पेंशन का अधिकारी हो पाता है, फिर ओ. आर. ओ. पी. की धारणा को नकार कर उसे वंचित रखना अन्यायपूर्ण निर्णय है !

८. सातवें वेतन आयोग द्वारा वेतन का आधार नए पे मेट्रिक्स लेवल करने से नुक्सान :

सातवें वेतन आयोग द्वारा पे मेट्रिक्स लेवल में वेतन निर्धारण करते समय बड़ी चूक की गयी है जिस के कारण ०१ जनवरी २०१६ के पश्चात् रिटायर होने वाले पूर्व सैनिकों को पुरानों से कम पेंशन मिल रही है, जिस से ओ.आर.ओ.पी. की अवधारणा का पूर्ण उल्लंघन हुआ है और पहली बार ऐसा अन्यायपूर्ण निर्णय देखने को मिल रहा है ! इसी के कारण ओ. आर. ओ.पी. द्वितीय में भी कुछ रेंक्स को तो एक नया पैसा भी नहीं मिल रहा है, बल्कि पेंशन कम हो गयी है!

९. पारिवारिक पेंशन के निर्धारण में वृद्धि :

पेंशनर की मृत्यु के पश्चात् उस की विधवा पर परिवार के पालन-पोषण का भार अधिक बढ़ जाता है, क्यों कि पेंशनर जीवित होता है तो वह पेंशन के अतिरिक्त आय वृद्धि के कुछ उपाय करता रहता है, जो उसकी मृत्यु पर समाप्त हो जाता है। अतः पारिवारिक पेंशन ६०% की स्थान पर अधिक राशी की सुनिश्चित की जाये !

१०. आनरेरी लेफ्टिनेंट और कप्तान की पेंशन वृद्धि में अनदेखी : पूर्व में आनरेरी लेफ्टिनेंट और आनरेरी कैप्टेन कमीशंड लेफ्टिनेंट और कप्तान से अधिक पेंशन लिया करता था, पर अब उन रेंक्स की पेंशन वृद्धि नहीं के बराबर की जा रही है। शायद इस मामले में भी दुर्भावनावश ऐसा किया गया है, क्योंकि अब टाइम स्केल प्रमोशन के कारण कोई कमीशंड ऑफिसर लेफ्टिनेंट, केप्टन और मेजर रेंक से रिटायर ही नहीं होता ! सामान भन्ने का भुगतान हो

११. जोखिम भरे अभियान और सेवा के लिए सभी के सामान भत्ते का भुगतान हो :

हाई-एलटीटयूट अलाउंस, नेवी में डाइविंग आवर्स, पेरा जम्पिंग अलाउंस का निर्धारण अधिकारी और

गैर अधिकारी सैनिक के वेतन के आधार पर नहीं हो कर समान होना चाहिए, क्योंकि ये सभी जोखिम

भरे अभियानों के लिए होते हैं और जोखिम सभी के लिए समान रूप से होता है !

१२. सेवादार प्रथा समाप्त की जाये :

सेना में चल रही सेवादार प्रथा "दास प्रथा" का पर्याय है, जो सैनिकों के मनोबल के गिराने वाली प्रथा है। इसे शीघ्र समाप्त करना देश हित में हैं !

१३. वीरता एवं उत्कृष्ट सेवाओं हेतु दिए जाने वाले पदकों में पारदर्शिता हो : प्रायः जवानों के मामलों में वीरता और उत्कृष्ट सेवाओं के मामलों में पक्षपात किया जाता है अतः इस के लिए पारदर्शी सिस्टम लागू किया जाना अपेक्षित है!

१४. अधिकारियों की तर्ज पर जे.सी.ओ./ जवानों को भी टाइम स्केल प्रमोशन दिया जाये :

अधिकारियों का एक बार कमीशन लेने के बाद बिना किसी रुकावट के टाइम स्केल प्रमोशन के कारण लेफ्टिनेंट कर्नल के रैंक तक पहुंचना सुनिश्चित है, पर जवानों के लिए अलग माप दंड होने से बहुत कम जवान प्रमोशन ले पाते हैं और वो अधिकारी ही निश्चित करते हैं कि जवान प्रमोशन के लिए योग्य है या नहीं! यह कैसी विडंबना है !


१५. जे.सी.ओ. व जवानों का पक्ष उन से ही सुना जाये :

जे.सी. ओ. और जवानों के कल्याण और उन से सम्बन्धित विषय के पक्ष आज तक कभी भी सही तरीके से सरकार के समक्ष नहीं रखे गए, अतः निर्णय लेने वाले सक्षम अधिकारी या विभाग उनके मामलों में अनभिग्य रहे हैं, जो मुख्य रूप से इन विसंगतियों के कारक हैं। प्रार्थना है भविष्य में अधिकारियों के

बजाय हमारे प्रतिनिधिमंडल से ही वार्ता कर हमारा पक्ष सुना जाये !

१६. फेडरेशन ऑफ़ वेटरन्स एसोसिएशन ही हमारा पक्ष रखने को अधिकृत हो : दिनांक ०९ अप्रैल २०२३ को भारत के सैंकड़ों वेटरन्स एसोसियेशन ने गैर अधिकारी पूर्व सैनिकों का पक्ष सरकार के सामने रखने हेतु सम्बद्धता प्राप्त कर फेडरेशन को अधिकृत किया है। अतः भविष्य में पूर्व सैनिकों की कुल संख्या के ९७% प्रतिशत पूर्व सैनिकों और युद्ध विधवाओं के कल्याण व् सुविधाओं के मामलों में फेडरेशन ऑफ़ वेटरन्स एसोसिएशन को ही वार्ता हेतु आमंत्रित कर हमारा पक्ष सुना जाये !

करीब 70 दिनों से चले आ रहे हमारे धरने के पश्चात् आज दिनांक 30.04.2023 को सभी सांसदों के माध्यम से ज्ञापन प्रस्तुत कर निवेदन है कि सरकार मांगों का संज्ञान ले, वार्ता कर समाधान किया जाये, अन्यथा संसद के घेराव जैसे कदम उठाने को हमें मजबूर होना पड़ेगा !

आशा ही नहीं हमें पूर्ण विश्वास है कि लोक-कल्याणकारी सरकार राष्ट्र रक्षा को समर्पित रहे पूर्व-

सैनिक के हितों की अनदेखी नहीं करते हुए शीघ्र ही मांगों का समाधान कर लाखों पूर्व सैनिक

परिवारों को अनुग्रहित करेगी!

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