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आईसीएआर-सीआईएएच, बीकानेर में खेजड़ी प्रवर्धन एवं उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण का शुभारंभ।

बीकानेर, 8 सितम्बर 2025 । आईसीएआर केंद्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (सीआईएएच), बीकानेर में आज से खेजड़ी कली प्रवर्धन एवं उत्पादन पर तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ। यह प्रशिक्षण राजस्थान ऑलिव कल्टीवेशन लिमिटेड (आरओसीएल) के फार्म प्रबंधकों एवं अधिकारियों के लिए आयोजित किया गया है, जिसमें प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों की नर्सरियों एवं फार्मों से आठ सरकारी अधिकारी भाग ले रहे हैं। प्रशिक्षण के उद्घाटन सत्र में प्रधान वैज्ञानिक डॉ. दीपक कुमार सारोलिया ने खेजड़ी के सांस्कृतिक, पारिस्थितिक एवं ऐतिहासिक महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने याद दिलाया कि किस प्रकार 1956 के अकाल के दौरान खेजड़ी ग्रामीण जीवनरेखा बनी थी और विकासात्मक दबावों जैसे सोलर प्लांट्स के कारण इसकी संख्या में आ रही कमी पर चिंता व्यक्त की। वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. पवन सिंह गुर्जर ने खेजड़ी को मरुस्थलीय क्षेत्रों का "कल्पवृक्ष" बताते हुए कहा कि आईसीएआर-सीआईएएच ने इसे बागवानी फसल के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास किए हैं। उन्होंने बताया कि 8 से 10 सितम्बर तक चलने वाला यह प्रशिक्षण दोतरफा सीखने की प्रक्रिया होगा। फसल उत्पादन प्रभागाध्यक्ष डॉ. दिलीप कुमार सामदिया ने खेजड़ी के रोपण के व्यावहारिक पहलुओं को समझाया तथा इसके न्यूनतम निवेश वाले स्वरूप पर बल दिया। उन्होंने कहा कि खेजड़ी को विशेष खाद, अधिक पानी या महंगे रसायन की आवश्यकता नहीं होती, बस उचित सुरक्षा से यह पनप सकती है। संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने वैज्ञानिकों एवं किसानों के प्रयासों की सराहना की और खेजड़ी की व्यावसायिक किस्म ‘थार शोभा’ को बढ़ावा देने की पहल को महत्वपूर्ण बताया। सत्र का समापन फसल उत्पादन प्रभागाध्यक्ष डॉ. धुरेन्द्र सिंह के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ। इस अवसर पर डॉ. के.एल. कुमावत और डॉ. एस.आर. मीणा भी संसाधन विशेषज्ञ के रूप में प्रशिक्षण से जुड़े हुए हैं। 

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