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सूरत से मानवता और सेवा की प्रेरक मिसाल: 12 वर्षों से निरंतर गौसेवा में समर्पित “श्री पूनरासर बालाजी सुंदरकांड मित्र मंडल” l

बीकानेर,( धर्मचंद सारस्वत )lसूरत शहर से एक अत्यंत प्रेरणादायक और सराहनीय पहल सामने आई है, जहां “श्री पूनरासर बालाजी सुंदरकांड मित्र मंडल” पिछले 12 वर्षों से निरंतर सेवा, समर्पण और धार्मिक आस्था का अद्भुत संगम प्रस्तुत कर रहा है। यह मंडल न केवल सुंदरकांड पाठ जैसे धार्मिक आयोजन करता है, बल्कि उससे प्राप्त होने वाली समस्त राशि को पूरी निष्ठा और पारदर्शिता के साथ गौसेवा में समर्पित करता है।
मंडल के मीडिया प्रभारी सांवरमल सारस्वत ने जानकारी देते हुए बताया कि हर आयोजन में समाज के लोगों का भरपूर सहयोग मिलता है। सुंदरकांड पाठ के माध्यम से एकत्रित धनराशि का उपयोग गायों के लिए चारा, स्वच्छ पानी, चिकित्सा सहायता और अन्य आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराने में किया जाता है। यह कार्य बिना किसी स्वार्थ के, केवल सेवा भाव से किया जा रहा है।
उन्होंने आगे बताया कि मंडल ने अपनी सेवा गतिविधियों को केवल शहर तक सीमित नहीं रखा, बल्कि सूरत से दूर ग्रामीण क्षेत्रों तक भी इसका विस्तार किया है। गांवों की गोशालाओं में नियमित रूप से चारे की व्यवस्था कर गायों की देखभाल सुनिश्चित की जा रही है। इसके साथ ही, अमरानी क्षेत्र के खोड़ में स्थित खेली में पिछले चार वर्षों से लगातार पानी की व्यवस्था की जा रही है। इस पहल से न केवल गायों को राहत मिल रही है, बल्कि अन्य वन्य जीवों को भी जीवनदायिनी सहायता मिल रही है।
मंडल के सदस्यों का मानना है कि गौसेवा केवल धार्मिक आस्था का विषय नहीं, बल्कि यह प्रकृति और पर्यावरण संतुलन से भी जुड़ा हुआ एक महत्वपूर्ण कर्तव्य है। उनके अनुसार, इस प्रकार के कार्य समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करते हैं और आने वाली पीढ़ियों को सेवा और संवेदनशीलता का संदेश देते हैं।स्थानीय नागरिकों और समाज के प्रबुद्धजनों ने मंडल के इस कार्य की खुलकर सराहना की है। उनका कहना है कि आज के समय में जहां अधिकांश लोग अपने व्यक्तिगत जीवन में व्यस्त रहते हैं, वहीं इस प्रकार का निःस्वार्थ सेवा भाव समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण है।
✨ प्रेरणा का स्रोत बना यह मंडल
“श्री पूनरासर बालाजी सुंदरकांड मित्र मंडल” आज केवल एक धार्मिक संस्था नहीं, बल्कि सेवा, समर्पण और मानवता का प्रतीक बन चुका है। यह मंडल समाज को यह संदेश दे रहा है कि यदि इच्छाशक्ति और सेवा का भाव हो, तो छोटे-छोटे प्रयास भी बड़े बदलाव ला सकते हैं।
👉 इस प्रकार, सूरत से शुरू हुई यह पहल आज मानवता, पशु संरक्षण और पर्यावरण सेवा की एक सशक्त मिसाल बनकर उभर रही है, जो निश्चित ही समाज के लिए प्रेरणा का स्रोत है।

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