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दिव्यांग बच्चों के हुनर से रोशन होगी दीपावली, 1 नवंबर को सजेगा दिवाली मेला; संस्थापक जेठा राम ने की खरीदारी की अपील।

बीकानेर, 30 October 2026 l12 हजार से अधिक दीपक सहित मोमबत्ती, अगरबत्ती, रूई-बाती और आर्ट एंड क्राफ्ट की आकर्षक वस्तुएं तैयार। शाम 5:30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम, अतिथियों का सम्मान और स्नेहभोज होगा।
बीकानेर। दीपावली खुशियों, रोशनी और आपसी प्रेम का त्योहार है। इस दीपावली दिव्यांग सेवा संस्थान, बीकानेर के मूक-बधिर एवं दिव्यांग बच्चे अपने हुनर और मेहनत से हजारों घरों को रोशन करने की तैयारी में जुटे हैं। बच्चों ने अपनी मेहनत से 12 हजार से अधिक दीपक तैयार किए हैं। इसके साथ ही मोमबत्तियां, अगरबत्तियां, रूई-बाती, आर्ट एंड क्राफ्ट, पेंटिंग, स्केचिंग, मिरर वर्क, झुमके एवं अनेक प्रकार की सजावटी वस्तुएं भी बनाई हैं।
संस्थान की ओर से प्रतिवर्ष दीपावली से पहले दिवाली मेले का आयोजन किया जाता है। इसी परंपरा को आगे बढ़ाते हुए इस वर्ष 1 नवंबर 2026, रविवार को शाम 5:30 बजे से दिव्यांग सेवा संस्थान में भव्य दिवाली मेला एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। हालांकि बच्चों द्वारा तैयार उत्पादों की प्रदर्शनी पिछले दस दिनों से लगाई जा रही है, जिसमें आमजन आकर खरीदारी कर सकते हैं। कार्यक्रम के दिन भी पूरे दिन प्रदर्शनी एवं बिक्री जारी रहेगी।
बच्चों की मेहनत को मिले समाज का सम्मान
दिव्यांग सेवा संस्थान के बच्चे पिछले कई दिनों से दीपावली की तैयारियों में जुटे हुए हैं। कोई दीपकों को रंगों से सजा रहा है, कोई मोमबत्तियां तैयार कर रहा है तो कोई आकर्षक सजावटी सामान और कलाकृतियां बना रहा है। बच्चों ने अपनी कल्पनाशक्ति और कलात्मक प्रतिभा से कई प्रकार के उत्पाद तैयार किए हैं।
संस्थान का उद्देश्य केवल वस्तुओं की बिक्री करना नहीं, बल्कि बच्चों की प्रतिभा को समाज के सामने लाना, उन्हें व्यावहारिक प्रशिक्षण देना और आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है।सरकारी अनुदान नहीं, जनसहयोग से चल रहा है संस्थान  के संस्थापक एवं संचालक जेठा राम बारूप ने बताया कि दिव्यांग सेवा संस्थान को राज्य सरकार की ओर से कोई नियमित सरकारी अनुदान प्राप्त नहीं हो रहा है। संस्थान समाज के सहयोग और शुभचिंतकों के विश्वास के सहारे दिव्यांग बच्चों की शिक्षा, प्रशिक्षण, भोजन और पुनर्वास का कार्य कर रहा है।उन्होंने बताया कि बच्चों द्वारा तैयार किए गए उत्पादों की बिक्री से प्राप्त राशि संस्थान के संचालन में लगाई जाएगी। इससे कर्मचारियों के वेतन, बच्चों के भोजन, कपड़े, शिक्षा, दवाइयों, बिजली और अन्य आवश्यक व्यवस्थाओं में सहयोग मिलेगा।
जेठा राम की आमजन से विशेष अपील
संस्थान संस्थापक जेठा राम ने शहरवासियों, व्यापारियों, उद्योगपतियों, सामाजिक संगठनों, दानदाताओं एवं आमजन से भावुक अपील करते हुए कहा कि दीपावली पर हम सभी अपने घरों और प्रतिष्ठानों के लिए दीपक एवं सजावटी सामान खरीदते हैं। इस बार मेरी आप सभी से विशेष विनती है कि बाजार से खरीदारी करने के साथ दिव्यांग बच्चों के हाथों से बने दीपक भी जरूर खरीदें।
उन्होंने कहा, "इन बच्चों ने बहुत मेहनत और लगन से हजारों दीपक तैयार किए हैं। इनकी छोटी-छोटी कोशिशों में बड़े सपने छिपे हैं। मैं चाहता हूं कि शहर का हर परिवार, हर व्यापारी और हर संस्थान इन बच्चों के बनाए दीपक खरीदे। आप इनका सामान खरीदेंगे तो बच्चों का उत्साह बढ़ेगा और संस्थान को आर्थिक संबल मिलेगा। हमारा प्रयास है कि बच्चे अपने हुनर से अपनी पहचान बनाएं और आत्मनिर्भर बनें। इस दीपावली आप केवल दीपक नहीं खरीदें, बल्कि इन बच्चों की मेहनत, प्रतिभा और सपनों को भी सम्मान दें।
सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और स्नेहभोज रहेगा विशेष आकर्षण
1 नवंबर को आयोजित कार्यक्रम में संस्थान के मूक-बधिर एवं दिव्यांग बालक-बालिकाएं सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देंगे। बच्चों की प्रतिभा, कला और आत्मविश्वास को मंच प्रदान किया जाएगा। कार्यक्रम में संस्थान से जुड़े सहयोगियों एवं विशिष्ट अतिथियों का सम्मान भी किया जाएगा। इसके साथ ही सभी अतिथियों, सहयोगियों और उपस्थित लोगों के लिए स्नेहभोज की व्यवस्था रहेगी।
कार्यक्रम में सादर आमंत्रण
दिनांक: 1 नवंबर 2026, रविवार
समय: शाम 5:30 बजे से सांस्कृतिक कार्यक्रम
प्रदर्शनी एवं बिक्री: पूरे दिन
स्थान: दिव्यांग सेवा संस्थान, सत्य गंगा पैलेस वाली बिल्डिंग, नया बस स्टैंड के पीछे, चौधरी कॉलोनी, गंगाशहर, बीकानेर।
संपर्क: 7073929237
संस्थान परिवार ने सभी शहरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में पहुंचकर बच्चों का उत्साह बढ़ाने, उनके बनाए दीपक एवं अन्य उत्पाद खरीदने और इस आयोजन का हिस्सा बनने का आग्रह किया है।
इस दीपावली एक संकल्प जरूर लें—अपने घर में रोशनी के लिए एक दीपक दिव्यांग बच्चों के हाथों से बना हुआ भी जलाएं। आपकी एक छोटी-सी खरीदारी किसी बच्चे के आत्मविश्वास और संस्थान के भविष्य के लिए बड़ा सहारा बन सकती है।
आइए, इस दीपावली बच्चों के हुनर को पहचान दें, उनकी मेहनत को सम्मान दें और उनके सपनों में उजाला भरें।

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