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शेखावाटी यूनिवर्सिटी में शोध: 16 विषयाें में 120 स्टूडेंट्स करेंगे पीएचडी, डाॅक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के बाद 6 माह का काेर्स वर्क शुरू हाेगा*

सीकर।  शेखावाटी विश्वविद्यालय के शुरू होने के 9 साल बाद शाेध कार्य शुरू हाेने जा रहा है। यूनिवर्सिटी की शाेध पात्रता परीक्षा (रेट) 2021 में 1411 विद्यार्थियाें ने परीक्षा दी थी। एक सीट की तुलना में तीन गुना स्टूडेंट्स काे डाॅक्टयूमेंट्स वेरिफिकेशन के लिए बुलाया जाएगा। इसकी सूची जल्द जारी कर दी जाएगी। डाॅक्यूमेंट्स वेरिफिकेशन के साथ ही अन्य प्रक्रिया भी दिसंबर तक पूरी हाेेने की संभावना है।
वैरिफिकेशन में जाे स्टूडेंट्स एलिजिबल हाेंगे उनके चयन करने के बाद छह माह का काेर्स वर्क करवाया जाएगा। इसमें 16 विषयाें के 120 स्टूडेंट्स काेर्स वर्क में तय सिलेबस के अनुसार रिसर्च मैथाेडाेलाॅजी के बारे में पढ़ेंगे। इसके बाद विवि स्टूडेंट्स का टेस्ट लेगी। पास हाेने वाले स्टूडेंट्स काे अलग-अलग विषयाें के रिसर्च सुपरवाइजर अलाॅट होंगे। शाेधार्थी अपने गाइड के मार्गदर्शन में रिसर्च का टाॅपिक चयन करेगा और रजिस्ट्रेशन व सिनाेपसिस सबमिट करवाई जाएगी। 
*लाॅ, फिजिकल एजुकेशन, गणित, जूलॉजी जैसे 16 विषयों में करवाई जाएगी पीएचडी*ईएएफएम, एबीएसटी, लॉ, फिजिकल एजुकेशन, गणित, जूलॉजी, बॉटनी, रसायन शास्त्र, भूगाेल, हिंदी, अंग्रेजी, संस्कृत, राजनीति विज्ञान, इतिहास, समाज शास्त्र, लोक प्रशासन में पीएचडी कराई जाएगी। विश्वविद्यालय ने इन विषयाें में पूर्व में ही रिसर्च सुपरवाइजर अपाॅइंट कर लिए हैं। 
इधर, साइंस काॅलेज के प्राचार्य डाॅ. एनके बावलिया ने बताया कि शेखावाटी विवि में शाेध कार्य शुरू हाेने से शेखावाटी की स्थानीय विषयाें व समस्याओं पर रिसर्च हाे सकेगा। शेखावाटी के कल्चर, बायाेडायवर्सिटी, पुरानी चीजें, छुपी हुई सभ्यता-संस्कृति व जैव विविधता के बारे में रिसर्च करने वाले लाेगाें काे पता चल सकेगा।
*इन विषयाें काे प्राथमिकता दी जाएगी :*

शेखावाटी यूनिवर्सिटी के कुलपति प्राे. भगीरथसिंह बिजारणियां कई बार कह चुके हैं कि वे शाेध में शेखावाटी के स्थानीय मुद्दाें व यहां की भाैगाेलिक परिस्थितियाें काे वरियता देंगे। 
शोध में शेखावाटी की हवेलियों, शेखावाटी के प्रसिद्ध धार्मिक स्थलाें, जलवायु व मिट्टी व पानी की उपलब्धता, पेयजल में फ्लाेराइड, किसान, खेती में नवाचार, सेठ-साहूकारों, भवन निर्माण कला, सैनिकों की शहादत व सैनिकों गांव, धार्मिक स्थलों व धर्मगुरुओं व गांवों की संस्कृति को प्राथमिकता दी जाएगी।

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