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तीन पीढ़ी स्यु डीक रया हां म्हारे रेल आसी के सब एडिटर सौरभ की रिपोर्ट

 

दशकों पहले एक ट्रेन चली थी जो शिलान्यास के बाद आज भी अपने स्टेशन पर नहीं पहुंच पाई है। इसी बीच इस क्षेत्र के सांसद, विधायक ,पालिका अध्यक्ष ,सरपंच ,पार्षद व अधिकारीगण बदलते गए लेकिन नहीं बदला तो यहां की जनता का एक सपना और वो सपना था रेल का।

इस रेल के खेल में दिलचस्प बात यह भी है कि इस क्षेत्र को पहले ऋणी फिर तारानगर (Taranagar) और अब यहां की जनता इसे स्टार सिटी (Star City) भी कह देती हैं। लेकिन इस सिटी के ट्रेन के स्टार अभी नहीं लग पाए हैं। सबसे मजे की बात तो यह है की शिलान्यास के बाद भी ट्रेन तो दूर की बात है यहां पटरिया भी नहीं बिछ पाई है। उससे भी मजे की बात यह है कि यहां के कुछ राजनेता डींगै हांकने में अब भी जरा सा भी संकोच नहीं करते हैं, और उनके समर्थकों का तो कहना ही क्या है।
नेताओं द्वारा दिए गए जनता को लॉलीपॉप  अब बात करते हैं यहां के नेताओं द्वारा दिए गए लॉलीपॉप की, नगर को रेल सेेवा से जोड़ने के लिए बीते 18 सालो में 6 बार रेल सर्वे के आदेश हुए, तो दो की फिजिकल रिपोर्ट नहीं मानी और चार सर्वे हुए ही नहीं। हुआ तो शायद यहां की जानता से धोखा? वैसे रेल यात्रा को सबसे सुगम यात्रा माना जाता है लेकिन इस यात्रा का इंतजार ये शहर वर्षों से कर रहा है,या यूं कहे कि दो दशकों से भी अधिक समय से यहां की जनता ने रेल के भरोसे नेता नगरी को वोट दे दिए। 
लेकिन सपना पूरा न हो सका, दरअसल हम बात राजस्थान (Rajasthan) के चुरू (Churu) जिले के तारानगर शहर की कर रहे हैं। तारानगर को रेल सेवा से जोड़ने के लिए 1998 से जद्दोजहद चल रही है। इसके लिए 6 बार सर्वे तो, कई बार सर्वे के लिए आदेश जारी हो गए जिनमें से रेलवे बोर्ड ने दो सर्वे रिपोर्ट फिजिकली सही नहीं मानी और मजे की बात ये है कि चार सर्वे हुए ही नहीं।सर्वे को लेकर पहला आदेश साल 1997-1998 के रेल बजट में हुआ जिसमें चूरू से तारानगर रेल लाइन (Churu to Taranagar Railway) का सर्वे हुआ तथा मजेदार बात यह है
कि तारानगर के सरदारशहर सड़क मार्ग (Taranagar to Sardarshahar Road) पर बालाजी पक्के जोहडे़ (Balaji Pakke Johde) के पास पटरी बिछाकर सर्वे का शिलान्यास भी कर दिया गया। जबकि जानकार बताते हैं कि इस सर्वे को रेलवे बोर्ड ने फिजिकली सही नहीं माना था।फिर करीब 9 सालो तक ये विषय चर्चा तक ही सीमित रहा। जिसके बाद साल 2009 में चूरू से नोहर (Churu to Nohar) वाया तारानगर  के सर्वे को भी सही नहीं माना गया। इसी बीच जिले के 22 लाख लोग तारानगर को रेल सेवा से जोड़ने का इंतजार करते रह गये।
बीते 18 साल में स्थान बदले सर्वे के ऑर्डर जारी हुए लेकिन ट्रेन नही आ पाई। साल 2016 के रेल बजट में फिर सर्वे के आदेश हुए। जिसके बीच राज्य सभा सदस्य नरेंद्र बुडानिया (Narendra Budania) ने दावा किया कि चूरू से तारानगर की सर्वे रिपोर्ट सही थी। उस समय वे सांसद थे। वे कहते है की अगर 1998 के बाद बजट स्वीकृत कर दिया जाता तो पटरियां बिछनी शुरू हो जाती। वर्ष 2000 या 2001 में तारानगर में रेल का संचालन शुरू तक हो जाता।अगर सर्वे की रिपोर्ट ओके हो जाती तो, कुछ न कुछ प्रक्रिया आगे बढ़ती।
इधर रेलवे के अधिकारी कहते हैं कि रेलवे बोर्ड के नियमों के तहत काफी लंबी प्रक्रिया के बाद बजट मिल पाता है जब सर्वे की रिपोर्ट ओके होती तो ही बजट की मुहर लगती है। जितना यहां के राजनेताओं ने रेल के लिए तारानगर को मोहताज बना दिया है उतना दरअसल है नहीं, क्योंकि रेलवे बोर्ड से जुड़े एक्सपर्ट्स मानते है कि अगर 2013 में घोषित 315 किमी का गजसिंहपुर-सादुसलपुर वाया पदमपुर, रावतसर, तारानगर-ददरेवा सर्वे आदेश पर काम होता तो मात्र छह माह में सर्वे पूरा हो सकता था। साथ ही करीब दो वर्षो में इस दूरी की पटरियां बिछाई जा सकती थी। साधारण शब्दों में कहें तो साल 2013 के घोषित सर्वे के आदेश पर काम होता तो साल 2016 में तारानगर रेल सेवा से जुड़ हुआ होता। लेकिन 2022 तक तो जुड़ नहीं पाया है।

ऐसा नहीं है कि यहां बड़े नेता नहीं है तारानगर क्षेत्र का नेतृत्व शुरू से ही दिग्गज नेताओं के हाथ में रहा है। चाहे फिर वे चार दशक तक राज करने वाले कांग्रेस नेता चंदनमल बैद हों, फिर उनके बेटे चंद्रशेखर या फिर तीन बार लगातार लोकसभा में जिले का नेतृत्व करने वाले रामसिंह कस्वां (Ramsingh Kaswan) साथ ही 2014 में और फिर 2019 में रामसिंह कस्वां के बेटे राहुल कस्वा (MP Rahul Kaswan) या राज्यसभा सांसद नरेंद्र बुडानिया या पूर्व पीडब्ल्यूडी मिनसिटर राजेंद्र राठौड़ भी 2008 में यहां से विधायक रहे हैं।
चूरु जिले में करीब 22.50 लाख लोगों को तारानगर में रेल सेवा शुरू होने का इंतजार है। वहीं तारानगर तहसील को रेल सेवा से जोड़ने पर दो लाख 12 हजार 372 लोगों को सीधा फायदा मिलेगा। तारानगर तहसील में करीब छोटे-बड़े 124 गांव हैं।(1) साल 2013 में गजसिंहपुर-सादुलपुर वाया पदमपुर, रावतसर, तारानगर-ददरेवा सर्वे के आदेश।(2) साल 2016 रेल बजट में सरदारशहर-तारानगर-सादुलपुर सर्वे की घोषणा हुई।(3) साल 2012 रेल बजट में भेजी गई 84 नई परियोजनाओं में योजना आयोग को मूल्यांकन के लिए चूरू-नोहर वाया तारानगर भी शामिल था।(4) साल 2010 सूरतगढ़-सरदारशहर-तारानगर-सादुलपुर होते हुए नई रेल लाइन डालने का सर्वे किया गया है पर कोई कार्यवाही नहीं की गई।
(5) साल 2009 में चूरू-नोहर वाया तारानगर नई रेल लाइन के सर्वे की घोषणा हुई ,सर्वे भी हुआ पर उसे सहीं नहीं माना गया।(6) साल 1998 में तत्कालीन सांसद नरेंद्र बुडानिया, विधायक चंदनमल बैद रेलवे बोर्ड के अधिकारियों ने बालाजी पक्के जोहडे़ के पास पटरी बिछाकर रेल लाइन के सर्वे का शिलान्यास करवाया दिया पर आगे कुछ नहीं हुआ।इस तरह की घोषणाएं होती आई है  जनता अब भी कहती है  कीता साल लागसी थक गया डीकता डीकता

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