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होली के नजदीक आते ही चंग की बिक्री भी जोरों पर

 

रंगों का त्योहार होली मस्ती और रसियो का त्योहार है। चंग और ढप की थाप फाल्गुनी मस्ती में जहां चार चांद लगाती है।होली के मौके पर चंग की थाप हर किसी को थिरकने को मजबूर कर देती है।इस तरह तैयार होता है चंग और ढप…चंग और नगाड़ों को तैयार करने में इन कारीगरों को कड़ी मेहनत करनी पड़ती है। फाल्गुन से एक से दो माह पूर्व ही कारीगर इन्हें तैयार करने में जुट जाते हैं।
 ढप और नगाड़े भेड़ और बकरे की खाल से बनाए जाते हैं, उसके बाद ढप बनाने का काम शुरू होता है. इसके लिए खाल को धोकर सुखाया जाता है. फिर लकड़ी की फ्रेम पर खाल को चढ़ाया जाता है और आंकड़े के दूध से फिर इसे धोया जाता है, जब यह सुख कर तैयार हो जाता है, तो इस पर विभिन्न रंगों से चित्र बनाए जाते हैं।
 होली से पूर्व एक चंग की कीमत साइज के अनुसार 500 से 800 रुपए होती है।चंग तैयार करते कारीगर चंग और ढप बनाने वाले इस परिवार ने बताया कि पहले चंग और ढप के खरीददार अधिक होते थे. अब दिनों दिन इनके खरीददारों में कमी आयी है। 







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