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गोचर की मालिक हो गाय, विश्व गाय दिवस मनाया जाए और गौ माता “राष्ट्रीय धरोहर”” घोषित की जाए

बीकानेर 12 अक्टूबर 2022. मां भारती सेवा प्रन्यास का प्रकल्प राष्ट्रीय गाय आंदोलन राजस्थान तुलसी सर्किल बीकानेर, के बैनर तले शिवबाड़ी में गौसेवकों की मीटिंग आयोजित की गई। मीटिंग में प्रस्ताव पारित कर गोचर की मालिक गाय को बनाने सहित गौ हित की मांगों के लिए राष्ट्रपति सहित राष्ट्रीय अधिकारियों को पत्र भेजा गया। विगतवार :- राजस्थान राष्ट्रीय आंदोलन के द्वारा संचालित “भारतीय देशी गोवंश राष्ट्रीय धरोहर महाअभियान”” के अंतर्गत आज शिवबाड़ी मठ मंदिर के महंत अधिष्ठाता संवित विमर्शानंद गिरि महाराज के कर कमलो से गाय को राष्ट्रीय धरोहर बनाने, उसकी महत्ता को अंतर्राष्ट्रीय रूप में स्थापित करने के महा अभियान का एक पत्र लिखकर शुभारंभ किया गया।
राष्ट्रपति भारत , उपराष्ट्रपति भारत, प्रधानमंत्री भारत सरकार नई दिल्ली, लोकसभा अध्यक्ष भारत सरकार, गृह मंत्री भारत सरकार, मुख्यमंत्री महोदय,समस्त राज्य व केंद्र शासित प्रदेश भारत गणराज्य, को पत्र प्रेषित कर पूज्य गौ माता के विषय- गाय व गोचर को उचित संरक्षण एवं राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्रदान करने के आग्रह किया गया।इस अवसर पर ब्रह्मचारी गोविंद स्वरूप महाराज ने कहा कि भारतीय देशी गोवंश हमारे राष्ट्र की धरोहर है, और सनातन काल से यह सनातन धर्म का आस्था का केंद्र रही है, वह वैज्ञानिक आधार पर,यह स्वास्थ्य, पर्यावरण, कृषि की अधिष्ठात्री रही है, गाय के कारण से भारतीय कृषि, विश्व का स्वास्थ्य आज तक अक्षुण बना रहा है, इन्ही धार्मिक, वैज्ञानिक, सांस्कृतिक मान्यताओं को ध्यान में रखते हुए गाय को राष्ट्रीय मान्यता प्रदान करे।संस्थान के मनोज कुमार सेवक ने कहा कि भारतीय देसी गोवंश एक राष्ट्रीय धरोहर है, इसलिए भारत सरकार से आग्रह है कि,अति शीघ्र भारतीय समाज वह संगठनों की महती मांगों पर कार्य कर सनातन हिंदू समाज की भावनाओं का आदर करें।
इस महाअभियान के राष्ट्रीय संयोजक सूरजमालसिंह नीमराणा ने कहा कि भारतीय देशी गोवंश की समस्त श्रेणी, प्रजाति को “”राष्ट्रीय धरोहर”” घोषित किया जावे। धरोहर बनाने के लिए तीन बिंदु की आवश्यकता पड़ती है, प्रथम- उस वस्तु, व्यक्ति, जीव, जिसका सामाजिक, आर्थिक, पर्यावरण, धार्मिक, आध्यात्मिक, महत्व हो। दूसरा- जो मानव जीवन के लिए बहुत उपयोगी हो, तीसरा- जिसकी नस्ल, प्रजाति समाप्त होने के समीप (कगार) पर हो। यह तीनो ही बातें भारतीय देशी गोवंश के संदर्भ में स्टिक उतरती है, भारतीय देशी गोवंश की बहुत सी नस्लें समाप्ति के समिप पर है, और यह मानव जीवन, मानव स्वास्थ्य, कृषि, पर्यावरण, आर्थिक प्रबंधन, आदि के लिए भी बहुत उपयोगी है। अतः इसे धरोहर घोषित करके गौमाता को सम्मान प्रदान किया जावे।इस अवसर पर ग्लोबल हिंदू फेडरेशन के प्रदेश महासचिव जलज सिंह ने कहा कि भारतीय देशी गोवंश की समस्त प्रजाति को उसके “”अनुवांशिक नाम से पुकारा जावे”” ना कि कैटल (मवेशी) शब्द से, सरकारी शब्दावली में गोवंश को उसके “वास्तविक नाम से पुकारा जावे”” जैसे- गाय, बछड़ा, बछड़ी, बैल, नंदी, सांड आदि आदि और अंग्रेजी में काऊ,बुल,काफ,ओक्स,आदि।

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