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नारायणी देवी रामगोपाल धनेरवा सुथार परिवार द्वारा आयोजित कथा में श्रोताओं सत्संग प्रेमियों में उमंग।

 श्रीडूंगरगढ़ बीकानेर। (तोलाराम मारू)।  श्रीडूंगरगढ़ में श्रीमद् भागवत कथा आडसर बास महेश्वरी सेवा सदन आयोजक श्री नारायणी देवी रामगोपाल सुथार भागवत कथा के तीसरे दिन कथावाचक श्री स्वामीश्रवणानंद सरस्वती ने कहा
यदि भागवत सुनकर आप भागवत न बन पाये, अपने को पहचान नहीं पाये तो भागवत सुनना किस काम का है। यह तो जीव की मुक्ति का ग्रन्थ है।धर्म कर्तव्य है- जो पाठ मिला है उसके प्रति कर्तव्यवान बने, निष्ठावान बने। रागरंजित होने, मोह से भरने के लिये पाठ नहीं दिये जाते हैं, मोह से ऊपर उठने के लिये दिये जाते हैं। 
मोहनिष्ठ होना अधर्म है, कर्तव्यनिष्ठ होना धर्म है। संत श्री श्रवणानन्द जी महाराज ने बहुत सुन्दर ढंग से विस्तार पूर्वक बताया।संसारी का मरण मातम होता है। महात्मा का मरण महोत्सव होता है, यह महामिलन होता है।दिल खोलकर अपने दिलदार(परमात्मा) से जो बात कही जाती है उसी का नाम स्तुति है।
धर्मात्मा की पहचान चार चीजों से होती है-सत्य- जीवन में सत्य की निष्ठा है की नहीं!पवित्रता- चरित्र, वाणी, आहार, विचार पवित्र हो!  तप- सहनशक्ति हो! दया- दूसरों के प्रति दया की भावना है की नहीं!
 सत्संग से श्रेष्ठ साधन भगवद् प्राप्ति का, आत्मप्राप्ति का दुनियाँ में है ही नहीं, जिसको सत्संग मिला है ।वह धन्य है। 
शाम को भगत माल कथा श्री भरत शरण जी महाराज द्वारा किया गया नारायणी देवी रामगोपाल सुथार परिवार की ओर आयोजित कथा में भाजपा जिला महामंत्री कुंभाराम सिद्ध जिला उपाध्यक्ष बजरंग सारस्वत बीकानेर भाजपा नेता किसनाराम गोदारा पूर्व सरपंच रतन सिंह राठौड़ सहित अनेक गांवों से भागवत कथा श्रावक श्रद्धालुओं उपस्थित रहे।

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