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प्रदेश में बढ़ रहे जल संकट को देखते हुए जल भंडारण चिंता का विषय कहां प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान डॉ गोयल ने

बीकानेर। प्रदेश में बढ़ रहे जल संकट को देखते हुए आने वाले समय में जल भंडारण चिंता का विषय बनता जा रहा है। जिसको देखते हुए जलखेत योजना के प्रभावी क्रियान्वन की आवश्यकता है।भारत की परमाणु सहेली के नाम से जानी जाने वाली डॉ नीलम गोयल ने हॉटल राजमहल में एक प्रेसवार्ता के दौरान योजना की जानकारी देते हुए बताया कि इस योजना के जरिये गांव आत्मनिर्भर बनेंगे और किसान एक खेती की बजाय तीन फसल साल भर में प्राप्त कर सकेंगे। राजस्थान राज्य की दौसा के छारेड़ा ग्राम पंचायत में हर खेत पर जलखेत के निर्माण से जल पर्याप्त मॉडल ग्राम पंचायत के रूप में विकसित किया जा रहा है। साथ ही, स्थानीय व किफायती चारे की व्यवस्था हेतु फेंसिंग, गुमटी व चौकीदार सहित चरागाह विकसित किये जाएँगे, स्थानीय व किफायती मशीनों की व्यवस्था हेतु कस्टम हायरिंग सेंटर विकसित किया जाएगा, कच्चे कृषि व सहचरी उत्पादन के मूल्य संवर्धन हेतु खाद्य व दुग्ध प्रसंस्करण इकाइयों की स्थापना की जाएगी। गोयल ने बताया कि पूरे देश में 250 गांव डॉर्क जोन में है। जिसके लिये यह योजना वरदान साबित होगी। इससे अन्य रोजगार के साधन भी उपलब्ध होंगे। जिनसे होने वाले मुनाफे को किसान उत्पादकों में ही एक सोसायटी के माध्यम से शेयरहोल्डर बतौर वितरित किया जाएगा। ग्रामीण परिवारों के लिए स्थानीय व किफायती रसोई-गैस, ऑर्गेनिक खेती के लिए जैविक खाद व कीटनाशक की व्यवस्था हेतु एक बायोगैससयंत्र की स्थापना की जा एगी। सभी सयंत्रों से तैयार उपभोक्ता माल की बिक्री हेतु पोर्टेबलमिनी-शॉप्स की स्थापना व ऑनलाइन ई-कॉमर्स प्लेटफार्म विकसित कियेजाएँगे। घर-घर पर वर्षाजल संरक्षण हेतु रूफटॉपरेनवाटरहार्वेस्टिंगसिस्टम व किचिन-बाथरूम के पानी को प्रकृतिक रूप से छानकर भूजलरिचार्ज करने हेतु सोख पिटों का निर्माण किया जाएगा ।

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