सांगरी-केर प्रसंस्करण पर प्रशिक्षण।
बीकानेर।सांगरी तथा केर दोनों ही सब्जीयाँ अपने स्वाद तथा पोषक गुणों के लिए जानी जाती हैं इन दोनों सब्जीयों की बाज़ार में वर्षभर अत्यधिक मांग रहती है। इसको ध्यान में रखते हुए केन्द्रीय शुष्क बागवानी संस्थान (सीआईएएच), बीछवाल, बीकानेर ने प्लान इंटरनेशनल संस्था तथा उद्यम वाहिनी बिज़नस सर्विसेज प्राइवेट लिमिटेड के सहयोग से कोलायत तहसील के ग्राम मोटावा से आई 20 ग्रामीण महिलाओं तथा युवा शिक्षित लड़कियों को स्वरोजगार के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए सांगरी तथा केर के प्रसंस्करण, पैकेजिंग व विपणन पर दो दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया।
प्रशिक्षण के दौरान महिलाओं ने देसी खेजड़ी से सांगरी की तुड़ाई करने का कार्य तथा सुखी सांगरी के उचित दाम नहीं मिलने की मुख्य समस्या बताई । इस कार्यक्रम में डॉ. पवन सिंह गुर्जर ने सांगरी की तुड़ाई, रोडिंग, ब्लान्चिंग तथा ड्राईंग के बारे में विस्तार से बताया । इसके अलावा केर और सांगरी के उत्पादों की बाज़ार के अनुसार पैकेजिंग, ब्रांडिंग तथा विपणन का भी व्यवहारिक ज्ञान दिया। केर और सांगरी के प्रसंस्करण हेतु लघु उद्योग स्थापित करने के लिए आवश्यक यन्त्र व मशीनों की जानकारी भी प्रदान की गयी। आईएबीएम, बीकानेर में कार्यरत डॉ. विवेक व्यास ने महिलाओं को मूल्य संवर्धित उत्पादों के विपणन के गुर सिखाए।प्रशिक्षण कार्यक्रम के समापन के दौरान संस्थान के निदेशक डॉ. जगदीश राणे ने बताया की सीआईएएच के वैज्ञानिकों ने अनेक किसान हितैषी तकनीकियों का विकास किया है किसान प्रशिक्षण प्राप्त कर अपना व्यवसाय शुरू कर सकते है डॉ. राणे ने महिला किसानों को समूह में कार्य करने की सलाह दी तथा स्वयं सहायता समूह बनाकर शुष्क फल-सब्जीयों का मूल्य संवर्धन




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