आचार्य पीयूष सागर सूरीश्वरजी के सान्निध्य मेंसामूहिक प्रतिक्रमण व तपस्याएं।
बीकानेर, 21 जून। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्य पीयूष सागर सूरीश्वरजी ने शुक्रवार को ढढ्ढा चौक के पांडाल तथा रांगड़ी चौक के सुगनजी महाराज के उपासरे में चतुर्दशी पक्खी पर्व पर अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने सामूहिक प्रतिक्रमण एकासना, नीवी, आयम्बिल व उपवास आदि की तपस्याएं की।
ढढ्ढों के चौक के पांडाल में आचार्यश्री ने प्रवचन में कहा कि जन्म लेने वाली प्रत्येक प्राणी की मृत्यु निश्चित है। मृत्यु के बाद किसी योनि में जन्म नहीं मोक्ष मिले इसके लिए वर्तमान जीवन की धर्म-आध्यात्म की नींव को मजबूत करें। संसार व आत्म स्वरूप को समझें तथा अपने में व्याप्त काम क्रोध, लाभे व मोह और अहंकार आदि दोषों व विकारों को दूर करें। सकारात्मक सोच के साथ चतुर्थ शरण को स्वीकार करें। धर्म भीरू ही आत्म कल्याण व मोक्ष के मार्ग का पात्र होता है पाप भीरू नहीं। प्रवचन पांडाल में बीकानेर के मुनि सम्यक रत्न सागर म.सा. व सुगनजी महाराज के उपासरे में विचक्षण ज्योति साध्वीश्री चंद्रप्रभा की शिष्या साध्वी चंदन बाला श्रीजी के नेतृत्व में श्रवक-श्राविकाओं ने प्रतिक्रमण किया। परमात्मा को प्रत्यक्ष महसूस करते हुए, अतीत के पापों व दोषों का क्षय व मुक्त करने की प्रार्थना प्रतिक्रमण के दौरान की।




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