चिंतामणि जैन मंदिर में सामूहिक स्नात्र महोत्सव में प्राचीन जिन प्रतिमाओं का वंदन।
बीकानेर, 23 जून। जैन श्वेताम्बर खरतरगच्छ के आचार्य जिन पीयूष सागर सूरीश्वरजी के सान्निध्य में रविवार को सुबह सात बजे भुजिया बाजार के प्राचीन श्री चिंतामणि आदिनाथ जैन मंदिर में खरतरगच्छ ज्ञान वाटिका के बच्चों की ओर से सामूहिक स्नात्र महोत्सव मनाया गया।
श्री चिंतामणि जैन मंदिर प्रन्यास के अध्यक्ष निर्मल धारीवाल ने बताया कि चिंतामणि आदिनाथ मंदिर में विक्रम संवत् 1380 (701 वर्ष पूर्व) में मंडोर में बनी श्री आदिनाथ दादा की अष्टधातु की प्रतिमा को संवत् 1561(520 वर्ष पूर्व) में किया गया। मंदिर की प्रतिष्ठा तीसरे दादा गुरुदेव श्री जिन कुशल सूरीश्वरजी ने करवाई थी। राव बीकाजी के शासन काल में बने इस जिनालय मं 1016 अष्ट धातु की प्रतिमा व अति प्राचीन प्रतिमाएं भूमिगृह में है जिसे बीकानेर के तत्कालीन महाराजा रायसिंह ने दिल्ली से सुश्रावक कर्मचंद बच्छावत आग्रह पर अकबार से सोना व अन्य कीमती वस्तुएं भेंट कर बीकानेर में लाई गई थी।
स्नात्र पूजा के दौरान श्री जैन युवा परिषद से सम्बद्ध ज्ञान वाटिका के बच्चों ने अदि प्राचीन भगवान आदि नाथ के साथ भूमिगृह में स्थित प्राचीन जिन प्रतिमाओं की भाव वंदना की। बच्चों ने भक्ति गीतों व मंत्रोंच्चारण के साथ स्नात्र पूजा में जैन धर्म के 24 तीर्थंकरों का जन्म कल्याण मनाया तथा शांति कलश स्थापित कर सबके मंगलमय जीवन कामना की। पूजा ज्ञान वाटिका की सुनीता नाहटा, रविवारीय जिनालय पूजा के समन्वयक ज्ञानजी सेठिया व पवन जी खजांची के नेतृत्व में की गई।




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