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गौरक्षक, समाज सुधारक, लोकदेवता वीर तेजाजी के मेले में दर्शनों के लिए उत्साहित भक्तों का मंगलम सिटी में उमड़ा सैलाब।

जयपुर (नि.सं.) राजस्थान, गुजरात और हरियाणा के सुप्रसिद्ध लोक देवता वीर तेजाजी की दशमी पर यहां जयपुर की मंगलम सिटी के मंदिर में विशाल मेला भरा गया । जहां तेजाजी की मूर्ति को सिर से नख तक विशेष अलंकार धारण कराए गए तथा ढोल ताशों के बीच तेजा टेर पर गाए गीतों व संकीर्तन के दौरान वीर तेजाजी के दर्शनों के लिए उत्साहित भक्तों का हुजूम उमड़ा । जिसका अद्भुत दृश्य प्रेस फोटोग्राफर कनिष्क मोदी ने अपने कैमरे में कैद किया तो समाजसेवी एडवोकेट राजेन्द्र मोदी द्वारा विभिन्न समाजसेवियों के साक्षात्कार लिए गए, जिसमें समाजसेवी फूलचंद दादरवाल ने बताया कि तेजाजी सत्यवादी, गायों के रक्षक और वचन के पक्के थे, उन्होंने अपनी बहन राजल की गायों को डाकुओं से छुड़ाया तथा अपने वचन को निभाने के लिए अपनी जीभ पर सर्प से डंक मरवाया । 
इस दौरान पोखरजी बेनीवाल ने बताया कि तेजाजी का जन्म 29 जनवरी 1074 को राजस्थान के नागौर जिले के खरनाल गांव में हुआ था तो रिछपाल सिंह ओला ने बताया कि तेजाजी के पिता का नाम ताहर देव और माता का नाम रामकुंवरी था । श्रीमती अर्चना ओला व सरिता मील ने बताया कि तेजाजी धोलिया जाट परिवार से थे । एडवोकेट सुरेंद्र मील ने बताया कि तेजाजी किसानों और उनकी फसलों के रक्षक थे जिन्हें भगवान शिव का ग्यारहवां अवतार माना जाता है । रामचंद्र जाट ने बताया कि आज भी उन्हें सर्प दंश से बचाने और कृषि की समृद्धि के लिए पूजा जाता है । प्रिंस स्कूल के निदेशक दीपाराम जाट ने बताया कि तेजाजी को काला और बाला का देवता भी कहा जाता है जो लीलण नाम की घोड़ी की सवारी करते थे उनका प्रतीक चिन्ह हाथ में तलवार और जीभ पर डंक मारता सर्प है । इस अवसर पर श्रवणराम चौधरी, मालाराम चौधरी, प्रिंस स्कूल के निदेशक दीपाराम जाट, मोहन जाखड़, कर्नल जगदीश राव, बहादुर राम धायल, नेमीचंद थारोल, नाथूराम,रामचंद्र जाट मदन चौधरी, आसुराम, मोतीराम, लखीराम, पुजारी सुरेंद्रजी पारीक आदि सैंकड़ों लोगों ने मंदिर में सामूहिक ज्योत प्रज्ज्वलित कर भजनों से बाबा को रिझाया तथा देश में सुख समृद्धि की कामना की ।

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