मुख्यमंत्री ने वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए सुजानगढ़ सदर थाना का किया उद्घाटन
चूरू, 18 अगस्त (cityexpressnews)। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा है कि आमजन को त्वरित न्याय, अपराधियों में भय और बेहतर कानून व्यवस्था के लिए राज्य सरकार पुलिस के सुदृढ़ीकरण एवं आधुनिकीकरण के लिए पूरी प्रतिबद्धता के साथ काम कर रही है।
विगत ढाई वर्ष में अनिवार्य एफआईआर पंजीयन, थानों में स्वागत कक्ष, महिला अपराध पर लगाम के लिए स्पेशल इनवेस्टीगेशन यूनिट सहित कई महत्वपूर्ण नीतिगत फैसले लेने के साथ ही पुलिस को आधुनिक संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। पुलिस इस भावना के साथ काम करे कि हर हाल में पीडि़त पक्ष को न्याय मिले।मुख्यमंत्री अशोक गहलोत बुधवार को जिले के सुजानगढ़ के नवसृजित सदर थाना के वर्चुअल कार्यक्रम के जरिए हुए उद्घाटन समारोह को संबोधित कर रहे थे। इस दौरान सुजानगढ़ में कार्यक्रम स्थल पर विधायक मनोज मेघवाल, बीकानेर रेंज के आईजी प्रफुल्ल कुमार, जिला कलेक्टर साँवरमल वर्मा, एसपी नारायण टोगस, एडीएम अनिल महला, पूर्व जिला प्रमुख भंवर लाल पुजारी, सभापति नीलोफर गौरी, एएसपी जगदीश बोहरा, एसडीएम मूलचंद लूणिया, पूर्व प्रधान पूसाराम गोदारा, सरपंच सविता राठी, उप सभापति अमित मारोठिया, विद्याधर बेनीवाल, रामावतार मंगलहारा, बजरंग सेन, मुकुल मिश्रा सहित जनप्रतिनिधि, अधिकारी व कर्मचारी मौजूद रहे।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार का प्रयास है कि क्षेत्रफल को देखते हुए प्रदेश में पुलिस थानों की संख्या में चरणबद्ध रूप से बढ़ोतरी हो। इस दिशा में प्राथमिकता के आधार पर नए थाने स्थापित करने के साथ ही पुलिस चौकियों को भी थानों में क्रमोन्नत किया जा रहा है, ताकि लोगों को परिवाद दर्ज कराने के लिए दूर नहीं जाना पड़े। पुलिस थानों को भवन और बेहतर संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध करवाने के लिए भी सकारात्मक सोच के साथ काम किया जा रहा है। गहलोत ने कहा कि राजस्थान ऐसा पहला राज्य है, जिसने अनिवार्य एफआईआर रजिस्ट्रेशन की नीति लागू की। इससे न्यायालयों में इस्तगासों में कमी आई है।
बलात्कार के प्रकरणों में वर्ष 2017-18 में करीब 33 प्रतिशत महिलाओं को एफआईआर के लिए कोर्ट जाना पड़ता था। अब यह आंकड़ा घटकर 16 प्रतिशत रह गया है। वर्ष 2019 में महिला अत्याचारों के 34 प्रतिशत प्रकरण पूरे देश में लंबित थे, जबकि राजस्थान में महिला अत्याचारों के प्रकरणों का प्राथमिकता से निस्तारण करने के कारण वर्ष के अंत तक मात्र 9 प्रतिशत प्रकरण लंबित थे। देश के दूसरे कई राज्यों में कम पंजीकरण के बावजूद राजस्थान से ज्यादा प्रकरण लंबित थे। उन्होंने कहा कि महिला दुराचार के प्रकरणों की जांच में लगने वाला औसत समय भी प्रदेश में 287 दिनों से घटकर 140 दिन रह गया है।मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य और जिला स्तर पर गंभीर एवं जघन्य अपराधों के अनुसंधान के लिए हीनियस क्राइम मॉनिटरिंग यूनिट स्थापित की गई है।
नई सोच के साथ पुलिस थानों के प्रशासनिक भवनों का क्षेत्रफल बढ़ाया जा रहा है। साथ ही, थानों में सीसीटीएनएस कक्ष, साइबर कक्ष, पुलिस अनुसंधान कक्ष, महिला बैरक, रेस्ट रूम, स्वागत कक्ष आदि का निर्माण किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि थानों में बड़ी संख्या में झूठे प्रकरण दर्ज होने की बात सामने आती है। वर्ष 2019 की रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान में कुल निस्तारित केसों में से करीब 45 प्रतिशत मामले झूठे (अदम वकू) पाए गए, जबकि राष्ट्रीय औसत 16 प्रतिशत है। पुलिस प्रोफेशनलिज्म के साथ काम करते हुए झूठे मामले दर्ज करवाने की प्रवृत्ति को हतोत्साहित करे और पीडि़त को न्याय दिलाना सुनिश्चित करे।
उन्होंने कहा कि ग्राम रक्षक, सुरक्षा सखी एवं सीएलजी सदस्य पुलिस एवं पब्लिक के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने में अपनी भूमिका निभाएं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार ने आमजन की उचित माहौल में सुनवाई के लिए थानों में स्वागत कक्ष के निर्माण का नवाचार किया है। पुलिस अधिकारी एवं मुख्य सचिव निरंजन आर्य ने कहा कि वाहनों एवं अन्य इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिए पुलिस को आवश्यक वित्तीय संसाधन उपलब्ध कराए गए हैं। इसका पुलिस की कार्यशैली पर सकारात्मक असर भी देखने को मिला है। पुलिस महानिदेशक एमएल लाठर ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि मुख्यमंत्री की पहल पर विगत ढाई वर्ष में पुलिस के सुदृढ़ीकरण की दिशा में अभूतपूर्व काम हुआ है। पुलिस थानों के नवीन भवनों का निर्माण, जर्जर भवनों की मरम्मत तथा आवासीय सुविधा के लिए राज्य सरकार ने पर्याप्त बजट उपलब्ध करवाया है। उन्होंने बताया कि करीब 454 पुलिस थानों में स्वागत कक्ष का निर्माण हो चुका है और शेष में कार्य प्रगति पर है।
प्रमुख शासन सचिव गृह अभय कुमार ने कहा कि कानून-व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए प्रदेश में विगत ढाई वर्ष में एक पुलिस जिला, 2 अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक कार्यालय, 21 थानों, 2 साइबर थानों, 32 चौकियों, 2 एटीएस की चौकियों, माफियाओं पर कार्रवाई के लिए एसओजी की 2 फील्ड यूनिट एवं एक एंटी नार्कोटिक इकाई का गठन किया गया है। साथ ही, 2422 हैड कांस्टेबल और कांस्टेबल को माइनर अनुसंधान के अधिकार दिए गए हैं।











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