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महात्मा गाँधी अंग्रेजी विद्यालय खोले है जिनमे 248 बालिका विद्यालयों है। जिनका सिर्फ माध्यम हिन्दी से अंग्रेजी किया गया है, और किसी प्रकार की सुविधाएं नही बढ़ाई है।

 

राज्य सरकार ने वर्तमान में  349 महात्मा गाँधी अंग्रेजी विद्यालय खोले है जिनमे 248 बालिका विद्यालयों है।  जिनका सिर्फ माध्यम हिन्दी से अंग्रेजी किया गया है, और किसी प्रकार की सुविधाएं नही बढ़ाई है। 

जिन बालिका विद्यालयों को अंग्रेजी माध्यम में परिवर्तित किया गया है उनमें अब सहशिक्षा शुरू होगी। पहले से ही इन विद्यालयों में निश्चित स्थान और संसाधन है, अब स्कूलों में लड़कों के प्रवेश होने से कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ेगा।
क्योंकि राजस्थान में अधिकतर बालिका विद्यालयों में खेल का मैदान भी नही होता है,  जिससे वहां पढ़ने वाले विद्यार्थी खेलो का प्रशिक्षण नही प्राप्त कर सकेंगे। दूसरा जो बालिका अंग्रेजी माध्यम में नही पढ़ना चाहती या उनके अभिभावक सह शिक्षा नही दिलवाना चाहते उन बालिकाओं का भविष्य क्या होगा बहुत ही चिंता का विषय है। 
इससे बालिका शिक्षा में कमी आयेगी और बहुत सी लडकिया ड्राप आउट हो जायेगी।वर्तमान समय मे अंग्रेजी माध्यम विद्यालय भी जरूरी है लेकिन सरकार को चाहिए कि नये अंग्रेजी माध्यम विद्यालय खोले सिर्फ इसकी खाना पूर्ति ना करे। लड़को और लड़कियों की विद्यालयों को सामान रूप से अंग्रेजी माध्यम बनाया जाये, 
और  सर्वप्रथम विद्यार्थियों के अनुपात आधार पर हिन्दी माध्यम से अंग्रेजी माध्यम बनाया जाये और ये निश्चित किया जाये कि सहशिक्षा विद्यालयों में सरकार द्वारा जारी मापदंडों पर वोह विद्यालय उचित है या नही।सभी के लिए खेल का मैदान अलग-अलग शौचालय की व्यवस्था होना भी जरूरी है।सरकार इस पर जल्द संज्ञान नही लेती है तो संघर्ष समिति द्वारा पूरे प्रदेश में आंदोलन किया जायेगा । क्योंकि संविधान भी हमे हमारी मातृभाषा में शिक्षा ग्रहण करने का अधिकार देता है।

राजस्थान का सामाजिक ताना बाना ऐसा है जिसमें में आज भी महिलाओं को घूंघट में रहना पड़ता है और कहीं कहीं पर आज भी बाल विवाह जैसी कुरीति मौजूद है, सरकार को अभी इस दिशा में भी काम करने की बहुत जरूरत है। ऐसे हालात में बालिका विद्यालय में सह शिक्षा शुरू हो जाने से बच्चियों का स्कूल से ड्रॉप आउट बढ़ जाएगा। सरकार को इस दिशा में सोचते हुए बालिका विद्यालय को सह शिक्षा में बदलने के निर्णय पर पुनर्विचार करने की आवश्यकता है।

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