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एनआरसीसी में राउंड टेबल सम्मेलन तहत गैर गोवंशीय दुधारू पशुओं के दूध की पौष्टिक औषधीय क्षमता पर मंथन

बीकानेर 28 अप्रैल 2022 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र में आज दिनांक को ‘हारनेसिंग फुल न्युट्रासिटिकल पोटेंशियल ऑफ नॉन बोवाइन मिल्क’ (गैर गोवंशीय दुधारू पशुओं के दूध की पूर्ण पौष्टिक औषधीय क्षमता का उपयोग) विषयक राउंड टेबल कॉन्‍फ्रेंस का ऑनलाईन/ऑफलाईन आयोजन किया गया। जिसमें देशभर के विभिन्‍न संस्‍थानों के वैज्ञानिकों, अनुसंधानकर्ताओं, कार्यक्षेत्र से जुड़े उद्यमियों ने सहभागिता निभाई।
इस सम्मेलन के अध्यक्ष के रूप में रूप में प्रो.(डॉ.) ए.के. श्रीवास्तव, चैयरमैन, कृषि वैज्ञानिक चयन मंडल, नई दिल्ली ने कन्‍ट्रीब्‍युशन ऑफ नॉन बोवाइन मिल्क संबंधित मुद्दों के साथ इस सम्मेलन की शुरूआत करते हुए गैर गोवंशीय दुधारू पशुओं यथा- भेड़, बकरी, ऊँट, घोड़े (इक्वाइन) के दूध की पौष्टिक औषधीय क्षमता पर विस्तृत विवरण प्रस्तुत किया तथा कहा कि भावी परिदृश्य में नॉन-बोवाइन पशुओं के दूध को प्रचलित करने की महत्ती आवश्यकता है। 
सम्मेलन के अंत में अध्‍यक्ष के निष्कर्षीय उद्बोधन में कहा कि नॉन-बोवाइन मिल्क की न्यूट्रासिटिकल थेरेपेटिक गुणधर्म को विज्ञान ने सिद्ध कर दिया है। अब इनके दस्तावेजीकरण की आवश्यकता है। उन्होंने इस संबंध में अमूल, उरमूल, आदविक व अन्य उद्यमियों का हवाला देते हुए इसे एक सकारात्‍मक संकेत माना।
 उन्होंने उपभोक्ताओं के भीतर जागरूकता बढ़ाने हेतु संवाद की अपेक्षा जताई, साथ ही नॉन बोवाइन मिल्क को बढ़ावा देने के लिए उचित संस्थानीय ढांचे के विकास की जरूरत है एवं इन प्रजातियों की उपलब्‍धता की मेपिंग विभिन्न पशुओं के दूध को पहचाने की किफायती, सुलभ तकनीकी की महत्‍ती आवश्यकता है। 
प्रो.श्रीवास्तव ने कहा कि हमें विविध प्रजाति विशेष एवं उपादेयता के आधार पर उत्पादों को बनाने की जरूरत है।डॉ. आर्तबन्धु साहू , केन्द्र निदेशक एवं कार्यक्रम संयोजक ने न्यूट्रासिटिकल एण्ड थिरेपैटिक पोटेंशियल ऑफ कैमल मिल्क व्याख्यान प्रस्‍तुत करते हुए उन्होंने ऊँटनी का दूध की विशेषताओं , न्यूट्रासिटिकल पोटेंशियल, औषधीय गुणधर्मों पर विस्तृत रूप से अपनी बात रखी। 
उन्होंने कहा कि ऊँटनी के दूध का विभिन्न मानवीय रोगों जैसे मधुमेह, ऑटिज्‍म, टीबी आदि के प्रबंधन में औषधीय महत्व है। डॉ. साहू ने ऐसे सम्मेलनों की महत्ती आवश्यकता जताई ताकि नॉन बोवाइन मिल्‍क के प्रति अधिकाधिक जागरूकता को बढ़ाया जा सके।
सम्मेलन में अतिथि वक्‍ताओं के रूप में डॉ. ए.के.सिन्दे, पूर्व प्रधान वैज्ञानिक, सीएसडब्‍ल्‍युआरआई,अविकानगर ने ‘न्युट्रासिटिकल प्रोपर्टीज् ऑफ शिप मिल्क’ , डॉ.वी.राजकुमार, प्रधान वैज्ञानिक, सीआईआरजी,मक्कदूम ने गॉट मिल्क : न्युट्रासिटिकल एण्‍ड थिरेप्‍युटिक प्रोपर्टीज् ‘ , डॉ. अनुराधा भारद्वाज, वरिष्ठ वैज्ञानिक, एनआरसीई, हिसार ने ‘
 न्युट्रासिटिकल वैल्युज् ऑफ इक्वाइन मिल्क’, डॉ. मनोज मिश्रा, एग्ज्युकेटिव डायरेक्टर, सहजीवन संस्था, गुजरात द्वारा ‘ कलेक्शन, प्रोसेसिंग एण्ड मार्केटिंग इश्यूज् ऑफ नॉन-बोवाइन मिल्क’ विषयक व्याख्यान प्रस्तुत किए।
इस अवसर पर प्रो.ए.के.श्रीवास्तव ने एनआरसीसी द्वारा विकसित उष्ट्र दुग्‍ध उत्पादों - कामिल्क -प्रोबायटिक ड्रिंकस् तथा कामिल्क-राबड़ी रिलिज किए गए। साथ ही उन्होंने कैमल डेमोस्ट्रेशन पॉईन्‍ट, कैमल स्टेच्यु का भी उद्धाटन किया गया। अतिथियों द्वारा वृक्षारोपण भी किया गया। कार्यक्रम के समन्वयक डॉ. वेद प्रकाश ने धन्यवाद प्रस्ताव ज्ञापित किया।

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