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परिवार प्रशिक्षण कार्यशाला का हुआ आयोजन : कोटा।

कोटा, साध्वी श्री अणिमाश्री जी के सानिध्य में कोटा के अणुव्रत भवन में परिवार - प्रशिक्षण कार्यशाला का 'मां' का आयोजन किया गया। साध्वी श्री जी के मार्मिक प्रवचन
को सुनकर विशाल परिषद भावविभोर हो गई।साध्वी श्री अणिमाश्री जी ने 'मां ही मंदिर, मां ही पूजा, मां से बढ़कर कौन है दूजा ' इस विषय है। 
पर सभा को संबोधित करते हुए कहा- मां ममता का महासागर है। मां सहनशीलता का सुमेरु है। त्याग का यज्ञ है- मां । कुर्बानी का जज्बा है- माँ। मां के आंचल में सूरज की
में रोशनी है चांद की चांदनी है तारों की टिमटिमाहट है। फूलों की खुशबू है। कोयल का गीत है- माँ मां सचमुच मां है।
मां ने ही अपनी संतान को सही संस्कार देकर
अपनी कोख की गरिमा बढ़ाई है और संतान को विश्वंध्य बनाया है। मां तो हर रोज सूर्य को दिया जाने वाला आस्था का अर्ध्य हैं। मां जिसकी वाणी में सत्य, आंख में शिव और हाथों में सौंदर्य है। मां-पिता का कर्ज उतारने का फर्ज अदा कीजिए। सुबह उठते ही उन्हें प्रणाम कीजिए। 
अपना सिर्फ उनके चरणों में टीका दीजिए। उनका हाथ अपने माथे पर रखवाइय। उनके हाथ से उनके उनके आभामंडल से जो किरणे निकलेगी रक्षा कवच बन जाएगी। मां- पिता का आशीर्वाद आपके जीवन पथ को आलोकित करेगा ।
साध्वी कर्णिकाश्री जी ने कहा- हैप्पी परिवार वह कहलाता है, जहां प्रेम हो, सौहार्द दो, सामंजस्य है। अपनत्व हो, प्रमोदभावना हो। एक दूसरे को आगे बढ़ाने की मनोवृति हो ।
डॉ. साध्वी सुधाप्रभा जी ने कहा- परिवार रूपी गाड़ी का ड्राइवर होता है - पिता, जो इस गाड़ी में बैठी हर सवारी को मंजिल तक पहुंचाता है।
पिता वह शख्स है, जो न दिन देखता है, न रात देखता है, बस परिवार की हालात देखता है।साध्वी मैत्रीप्रभा जी ने मंच संचालन करते हुए कहा - परिवार के सदस्य एक दूसरे को क्रिटिसाइज न करें । 
एक दूसरे में कंपैरिजन न करें। एक दूसरे की कंप्लेन न करें। केयरफुल जरूर रहे, यही खुशहाल परिवार के सूत्र है। साध्वी समत्वयशा जी ने- मां- बाप पर भावपूर्ण गीत का संगान कर परिषद को भावविभोर कर दिया। जयपुर से समागत सेठिया परिवार के भाइयों ने सुंदर मंगल संगान किया।

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