कोई जैन बने या न बने किन्तु गुडमैन अवश्य बने- साध्वी अणिमाश्री जी।
कोटा। साध्वी श्री अणिमाश्री जी के सान्निध्य में अणुव्रत- भवन में पर्युषण महापर्व का *पांचवा दिन अणुव्रत-चेतना दिवस* के रूप में मनाया गया ।साध्वी श्री ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा- तेरापंथ धर्मसंघ के नवम अधिशास्ता *आचार्य तुलसी*
ने एक मानव धर्म की कल्पना की।
उन्होंने देश की आजादी की घोषणा के साथ ही एक घोष दिया था- असलीआजादी अपनाओं उन्होंने अपनी दूरदर्शी सोच के साथ एक ऐसे आन्दोलन की शुरुआत की,जो मानव को मानवता से जोड़ने का शंखनाद था। वो अणुव्रत आन्दोलन के नाम से विख्यात हुआ।
किसी भी धर्म संप्रदाय का व्यक्ति अपने संम्प्रदाय में रहकर आराधना करते हुए छोटे- छोटे नियमों से जुड़कर अपने कल्याण के साथ-साथ व्यसनमुक्त समाज के निर्माण में योगदान दे सकता है। अणुव्रत नैतिक क्रांति है, नैतिक अभियान है, जो कांटों के बीच भी नैतिक सुरभि का
संचार करने वाला है।
साध्वीश्री जी ने भगवान महावीर के भवों का मनभावन शैली में रोचक विवेचन किया। मंगल ग्रह की व्याख्या कर परिषद को जीवन मंगलमय बनाने की प्रेरणा दी।साध्वी डॉ. सुधाप्रभा जी ने कहा- आचार्य तुलसी जानते थे प्राचीन भारत चरित्र संपन्न राष्ट्र था। चरित्र संपन्नता व नीति-निष्ठा की बात अतीत का पृष्ठ बनकर न रह जाए।
वर्तमान में भी निति-निष्ठा जीवंत होनी चाहिए। चरित्र संपन्नता व नीति-निष्ठा की बुनियाद पर उन्होंने *अणुव्रत आंदोलन* का सुत्रपात किया साध्वी जी ने अणुव्रत के नियमों की विस्तृत व्याख्या की और परिषद से अणुव्रत के संकल्पोंको स्वीकार करने की प्रेरणा दी।
विशाल परिषद से साध्वी श्रीजी की प्रेरणा से अणुव्रत के नियमों स्वीकार किया। कन्यामंडल ने सुमधुर गीत से मंगल संगान किया।साध्वी समत्वयशाजी ने आगमवाणी, का रसपान करवाया।
'साध्वी मैत्री प्रभाजी ने मंच संचालन करते हुए कहा- आचार्य तुलसी का एक ही आहवान था कोई जैन बने या न बने किन्तु गुडमैन अवश्य बने। अणुव्रत के द्वारा व्यक्ति गुडमैन बन सकता है।
सभा मंत्री धर्मचन्द जैन, तेयूप के कमलेश जैन व अणुव्रत समिति के भूपेन्द्र बरड़िया ने सूचनाएं संप्रेषित की और अणुव्रत समिति,कोटा के द्वारा से अणुव्रत के संकल्प पत्र भरवाए।




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