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कोटा में बारह व्रत कार्यशाला का आयोजन

मृत्यु से अमरत्व की ओर ले जाने वाली प्रक्रिया का नाम है- व्रत* *साध्वी अणिमा श्री जी कोटा साध्वी श्री अणिमाश्रीजी के सान्निध्य में तेरापंथ भवन में तेयुप कोटा के तत्वावधान में बारह-व्रत कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें अच्छी संख्या में भाई-बहनों ने भाग लिया ।
साध्वी श्री अणिमाश्रीजी ने अपने प्रेरक उद्बोधन में कहा
अस्त-व्यस्त जिन्दगी को व्यवस्थित करने वाली पद्धति का नाम है- व्रत | आवृत्त शक्तिको अनावृत्त करने वाली समीचीन प्रक्रिया हे व्रत | जीवन व जगत की प्रत्येक समस्या को समाहित करने वाली सारणि है- व्रत । 
जीवन की संयमित प्रयोगशाला का नाम हे-व्रत | भगवान
महावीर ने श्रावक धर्म की व्याख्या बारह-व्रतों के साथ
की है। व्रतों के स्वीकरण के द्वारा व्यक्ति निश्चिंतता, स्थिरता और कल्याण के पथ पर अग्रसर हो सकता है। जरूरत है प्रत्येक श्रावक बारह व्रतों के हार्द को विस्तार से समझे एवं समझ पूर्वक हृदयंगम करने की विशिष्टता से जुड़े । 
हर श्रावक बारह वती बने एवं जीवन को व्रतों के आलोक से आलोकित करें।साध्वी कर्णिकाश्री जी ने अपने वक्तव्य में कहा- जैन परम्परा में श्रावक का अपना एक महत्वपूर्ण आचार पक्ष रहा है। जैन धर्म में अनुयायी की संपूर्णता बारह व्रतों के स्वीकरण के साथ जुड़ी हुई है।
 डॉ. साध्वी सुधाप्रभा जी ने मंच संचालन करते हुए कहा
अंधकार से प्रकाश की ओर, असत्य से सत्य की ओर, मृत्यु से अमरत्व की और प्रस्थान करने का साधन है- व्रत | व्रत आत्मिक सुख की अनुभूति का द्वार है। उल्लास का अनुपम क्षण है।
साध्वी समत्व यशाजी ने परिषद के साथ जोश के साथ
"श्रावक व्रत धारो रे" गीत का संगान किया।के बारे में जानकारी देते हुए बारह-व्रती बनने की प्रेरणा दी *तेयुप अध्यक्ष आनन्द दुगड़* ने बारह-व्रत कार्यशाला के बारे में जानकारी देते हुए बारह व्रती बनने की प्रेरणा दी और  तेयुप कोटा सदस्यों के संग विजय-गीत द्वारा कार्यक्रम का शुभारंभ हुआ।

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