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दहेज प्रथा बंद हो जाए तो शीर्ष पर होगा देश संघर्ष और धैर्य को हथियार बना लो।

जयपुर ( नि. सं. ) आप दुनिया के किसी भी कोने में रहें , अपनी संस्कृति पर गर्व करें , इसी संस्कृति ने मुझे भी भीड़ से अलग बनाया है, क्योंकि हमारी संस्कृति ही हमारी पहचान है । कहानी केवल उनकी बनती है जो संघर्ष और धैर्य को अपना हथियार बनाते हैं । अपेक्षा के अनुरूप फल की प्राप्ति नहीं होना ही हमारे जीवन में दुखों का कारण है । जिस दिन आप अपने मन को व स्वभाव को जीत लेंगे, उसी दिन आप का अभाव मिट जाएगा । यह कहना है नेशनल प्राईड अवार्डेड " *दर्पण "* एनजीओ की चेयरमैन नई दिल्ली की सीमा कौशिक का । 
इसी अवसर पर दूसरी नेशनल प्राईड अवार्डेड श्रीमती कांतादेवी मोदी ने कहा कि आज विदेशी भी हमारे धर्म और संस्कार का सम्मान करते हैं । विदेशों में बेटी के जन्म को गुडलक माना जाता है । इसकी एक वजह यह भी है कि वहां बेटी की शादी के लिए दहेज नहीं देना पड़ता । ऐसी सोच जब भारतीय समाज में आ जाएगी तब हम भी दुनिया में शीर्ष पर होंगे । जयपुर में एक समारोह में दोनों को सम्मानित करते हुए माता हिंगलाज एंड वरुण देव चेरिटेबल ट्रस्ट के राष्ट्रीय अध्यक्ष समाजसेवी एडवोकेट राजेन्द्र मोदी ने बताया कि दोनों में समानता यह रही कि दोनों के ही पतियों ने युवावस्था में इनकी ही गोद में अंतिम श्वास लिया, लेकिन इन्होंने कभी हिम्मत नहीं हारी, दोनों ने संघर्ष किया और आज समाज के सामने ऐसे एन जी ओ के मार्फत परित्यक्ता , तलाकशुदा एवं असहाय महिलाओं के कल्याण के लिए एक दिल्ली में तो दूसरी जयपुर में डटी हुई हैं ।

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