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603वा लंगर लगाया गया। शितला सप्तमी अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया।

श्रीगंगानगर 26 अगस्त: श्री गुरु अर्जुन दास सत्संग भवन के संस्थापक एवं श्री रूद्र हनुमान सेवा समिति के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा सत्संग भवन में रविवार को 603वा लंगर लगाया गया। शितला सप्तमी अष्टमी को कृष्ण जन्माष्टमी महोत्सव मनाया गया भोग लगाकर प्रसाद वितरण किया लंगर मे शितल रोटी मिठी व नमकीन रोटी घिया आलू की सब्जी मखन युक्त लस्सी व चने युक्त राइस प्रसाद वितरण किया गया। समिति द्वारा सेवाएं श्री गुरु अर्जुन दास, हुक्मी देवी, संगठन मंत्री सतपाल कोर,अनुज मल्होत्रा,पडित नरेश शर्मा, आशा रानी, सुभाष छाबडा, राजेश, अंगी एमडी सतीश, राजरानी, दिया, खुशी, निशा, नवनीत मलोट, साहिल, देवेंद्र, संजु, यशपाल,पुनम,मदन घोडेला, जगतार सिंह, सिद्धू, महेंद्र भटेजा व अन्य सदस्यों द्वारा दी गई। सभी ने तन मन से सेवा दी।
श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा ब्रह्मचर्य कल्याण स्वरुप महाराज (श्री धर्मसंघ संस्कृत महाविद्यालय) से मुलाकात की एवं सनातन धर्म और आध्यात्मिकता के बारे में चर्चा की और धर्म में आई कुरीतियों को दूर करने पर बल दिया।
श्री गुरु अर्जुन दास जी द्वारा कृष्ण जन्माष्टमी पर्व की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं दी गई और गुरु अर्जुन दास जी के आशीर्वचन में कहा गया कि भारत देश में मनाये जाने वाले पर्व और जयन्ति मनुष्य को उसकी विवेचना करने, उनकी महानताओं को आत्मसात करने तथा स्मृतियों को ताजा करने के होते हैं। वैसे जन्म तो हर एक मनुष्य का मनाया जाता है परन्तु कुछ महापुरुष अथवा देवपुरुष ऐसे हैं जिससे लोगों को अलौकिक एवं आध्यात्मिक शक्ति तथा महान कर्म करने की प्रेरणा मिलती है। यही कारण है कि विज्ञान के युग में भी इसकी महत्ता दिनों-दिन बढ़ती जाती है। ऐसे भी, आज के युग में श्रीकृष्ण की जयंति मना लेना ही पर्याप्त नहीं बल्कि उनके द्वारा किये महान कर्मों के बारे में गहराई से चिंतन करने की आवश्यकता है। उनका जन्म एक ऐसे वक्त पर हुआ जब संसार में अधर्म, पापाचार, अत्याचार, पारिवारिक ताना-बाना छिन्न-भिन्न होना, आसुरी वृत्ति का बोलबाला, सत्यता लुप्त होकर झूठ का साम्राज्य था। उनकी बाल-लीलाओं तथा प्रत्येक कर्मों की आध्यात्मिक व्याख्या मनुष्य के लिए सन्देश है। 

        

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