एनआरसीसी देगा ऊँट के बालों से पारंपरिक उत्पाद बनाने का प्रशिक्षण
बीकानेर 12 अक्टूबर, 2021 । भाकृअनुप-राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, बीकानेर के वैज्ञानिकों ने आज गांव कक्कू, नोखा में ऊँट के बालों से उत्पाद तैयार करने संबंधी पारंपरिक व्यवसाय से जुड़े पशुपालकों से संवाद किया। केन्द्र की अनुसूचित जाति उप-योजना के तहत आयोजित इस संवाद कार्यक्रम में कक्कू ग्राम वासियों ने विशेष रूचि दिखाई।
पशुपालकों से बातचीत के दौरान केन्द्र के निदेशक डॉ. आर्तबन्धु साहू ने कहा कि प्रदेश में ऊँटों की पारंपरिक उपयोगिता विविध रूपों में देखी जा सकती है। इसी क्रम में राष्ट्रीय उष्ट्र अनुसंधान केन्द्र, ऊँट की ऊन से हस्त-निर्मित पारंपरिक उत्पादों की लोकप्रियता, जिनमें कई लुप्त हो रही है, को बढ़ानी की मंशा रखता है जिनकी पर्यटन उद्योग में काफी मांग देखी जा सकती है।
डॉ.साहू ने केन्द्र में इस प्रयोजनार्थ एक प्रशिक्षण कार्यक्रम के आयोजन की बात कही तथा गांव के कुशल कारीगरों से यह अपेक्षा जताई कि वे प्रशिक्षण के माध्यम से अन्य ऊँट पालकों को भी इस व्यवसाय में प्रशिक्षित करें ताकि अधिकाधिक पशु पालकों को संबंधित व्यवसाय से रोजगार प्राप्त हो सके।
इस अवसर पर कक्कू गांव के सरपंच श्री हेमेन्द्र सिंह ने केन्द्र वैज्ञानिकों को यह जानकारी दी कि ग्राम स्तर पर भेड़ की ऊन का धागा तैयार किया जाता है जो कि बीकानेर की विभिन्न ऊन मीलों को भेजा जाता है,
यदि भेड़ की ऊन के साथ-साथ ऊँट के बालों का भी उपयोग लिया जा सके तो कई पशु पालकों को इसका लाभ मिलेगा और ग्रामीणों के समाजार्थिक स्तर में सुधार लाया जा सकेगा।इस अवसर पर केन्द्र के प्रधान वैज्ञानिक एवं उप-योजना नोडल अधिकारी डॉ. आर.के.सावल ने कहा कि ऊँट के




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