देश का एकमात्र हाथी गांव योजना की हालत सुस्तहाथी पर रोजाना 3000 का खर्च पालकों और महावतों पर संकट के बादलजब खुद भूखे रहे लेकिन हाथियों को पेट भरा।
उमेश कुमार मोदी। सिटी एक्सप्रेस न्यूज।आमेर ।हाथी गांव की खासियत-ःराजधानी जयपुर के आमेर कुंडा इलाके में बसा हाथी गांव पर्यटन के नजरिये से बेहतरीन जगह है। दुनिया का तीसरा और भारत का पहला हाथी गांव अपने आप में महत्वपूर्ण है। जिसे केवल हाथियों के लिए बसाया गया है यहां हाथी सफारी का आनंद लिया जा सकता है. 100 एकड़ में बना एकमात्र हाथी गांव है. जहां पर असम और केरल के हाथी हैं फिलहाल यहां लगभग 86 हाथी हैं. हाथियों के लिये थान बनाए गये हैं. इस गांव को बसाने का मकसद हाथियों को यहां बसाना और उन्हें सुरक्षित व मुनासिब माहौल उपलब्ध करवाना था। हाथियों की पहचान के लिए हर हाथी के कान के पास माइक्रोचिप लगाई गई है, जिसमें हाथी का नाम और रजिस्ट्रेशन नंबर फीड है।
एलीफेंट राइडिंग रोटेशन के द्वारा-ः
राजधानी जयपुर के आमेर में पर्यटकों की कमी ने आमेर के हाथी पालकों और महावतों की आर्थिक दशा खराब कर दी है। जयपुर में करीब 86 हाथी हैं. जयपुर में सिर्फ आमेर महल पर एलीफेंट राइडिंग होती है, पर्यटकों की तादाद बेहद कम रहने से सभी हाथियों का नंबर रोटेशन में नहीं आ पाता. जिस हाथी का नंबर रोटेशन में नहीं आता, उसका अगले दिन नंबर आता है. इस तरह आमेर में एक दिन में 20 से 30 हाथियों का ही नंबर राइडिंग में आ रहा है।
मिली जानकारी के अनुसार एक हाथी पालने में रोजाना करीब ढाई से तीन हजार रुपए का खर्च आता है। इसमें वह करीब 250 किलो गत्रा, 40 किलो सूखी ज्वार, 15 किलो रंजका चारा शामिल है आमेर महल में हाथी सवारी और शादियों, त्यौहार पर मेले शोभा यात्रा के आयोजन में ही हाथी की सवारी से उनकी आमदनी होती है। परिवार और हाथी का पेट भरना मुश्किल हो रहा है। कोरोना काल में ऐसे भी मौके आए जब खुद भूखे रहे लेकिन हाथियों को पेट भरा। समस्या यह है कि वे प्रतिदिन हाथी पर 3 हजार रुपये खर्च करें या फिर अपना घर चलाएं. ऐसे में हाथियों के चारे के लिए भी महावतों और पालकों को कर्ज लेना पड़ रहा है. इसके पीछे वजह है कि हाथी इनके लिए जानवर नहीं, परिवार का हिस्सा है।
गेस्ट हाउस की दीवारों एवं छत पर दीमक-ः
सरकार ने हाथी और हाथी पालकों और महावतों को संबल देने के लिए हाथी गांव योजना शुरू की थी. जयपुर के आमेर में बना हाथी गांव प्रकृति की गोद में बसा है, यहां सघन हरियाली, हाथियों के लिए बाड़े, चारे और तालाब की व्यवस्था है। उम्मीद थी हाथी गांव हाथी सवारी के लिए प्रसिद्ध होगा और यहां तक सैलानियों की पहुंच होगी, इस सोच के साथ हाथी गांव में लग्जरी गेस्ट हाउस भी बनाया गया गांव में पर्यटकों के लिए एक गेस्ट हाउस भी तैयार किया गया था, जिसमें इस गांव में आने वाले पर्यटकों को रूकने की व्यवस्था मिलने वाली थी, लेकिन यहां पर वन विभाग के अधिकारी गांव के गेस्ट हाउस को केवल निजी पार्टी के काम में लेते है, जबकि इसका उपयोग पर्यटकों को दिए जाने के बाद से होने वाली कमाई हाथी कल्याण संस्था में जमा होनी थी, लेकिन विभाग की अनदेखी के चलते गेस्ट हाउस की दीवारों एवं छत पर दीमक लग चुकी है।
70 लाख रुपये की लागत से तैयार वीआईपी गेस्ट हाउस बैकफुट पर -ः
लाखों की लागत से बना गेस्ट हाउस अभी वर्तमान में बंद पड़ा है वन विभाग ने हाथी गांव में करीब 5 साल पहले 70 लाख रुपये की लागत से पर्यटकों के लिए वीआईपी गेस्ट हाउस बनाया था. गेस्ट हाउस में खूबसूरत पेंटिंग से सजे चार लग्जरी कमरे बनाए गये थे. प्रति कमरा 5 हजार की दर भी तय की गई थी. लेकिन कई साल से ये लग्जरी गेस्ट हाउस बंद है. वन विभाग भी गेस्ट हाउस को खुद चलाने की बात पर बैकफुट पर आ गया है. फिर इसे पीपीपी मोड पर देने का फैसला किया गया था. हाथी गांव में लग्जरी गेस्ट हाउस इसकी वजह ये है कि पर्यटकों को यहां तक लाने के लिए अच्छी खासी मार्केटिंग की जरूरत है, जो वन विभाग अपने स्तर पर नहीं कर पा रहा है. वन विभाग ने गेस्ट हाउस को पीपीपी मोड पर देने के लिए टेंडर भी जारी किए, लेकिन किसी ने भी टेंडर लेने में भी दिलचस्पी नहीं दिखाई टेंडर में किसी ने रूचि क्यों नहीं ली, इसका भी जवाब है। दरअसल वन विभाग के इस गेस्ट हाउस की दरें थ्री स्टार होटल से भी ज्यादा थीं. ऐसे में कोई भी फर्म आगे नहीं आई।
घाट गेट था किसी वक्त महावतों का मोहल्ला-ः
घाट गेट के पास था महावतों का मोहल्ला मिली जानकारी के अनुसार बताया जा रहा है कि जयपुर के घाट गेट इलाके में किसी वक्त महावतों का मोहल्ला हुआ करता था. शहर की जनसंख्या बढ़ी तो हाथियों को रखने में दिक्कत होने लगी. इसलिये सरकार ने हाथी गांव बनाया. हाथी पालक बल्लु खाँन ने बताया कि हाथियों की दिनचर्या सुबह 5 बजे से शुरू हो जाती है. चारा-पानी और नहलाना प्रमुख काम होता है। रोटेशन नंबर के हिसाब से हाथी आमेर महल में राइडिंग के लिए जाते हैं. महल में राइडिंग के बाद हाथी यहीं लौट आते हैं




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