लोक संस्कृति हुई साकार, शामिल हुई महिलाएं व श्रद्धालु, देखने उमड़ी भीड़।
श्रीडूंगरगढ़। धार्मिक और पारंपरिक लोक गीतों से गुंजायमान धरा और अम्बर, उल्लसित चेहरे, बाइक्स पर सजे रौबीले युवा, सजे-धजे घोड़े, ऊँट, रथ और उनमें सजी झांकियां, संस्कृत विद्यालय के विद्यार्थी मंगल संगान करते हुए, सिर पर कलश लेकर मंगल गीतों का संगान करते हुए पंक्तिबद्ध चलती महिलाएं, कच्छी घोड़ी पर नृत्य करते कलाकार और साथ में उमड़ा जनसैलाब। यह दृश्य नजर आया श्रीडूंगरगढ़ धर्मनगरी का। जहां हर एक धार्मिक आयोजन बड़े रंगारंग तरीके से मनाया जाता है। ऐसे में गणगौर की शाही सवारी गणगौर मेला समिति के तत्त्वावधान में बड़े उल्लास के साथ निकाली गई जिसमें कस्बे के हर वर्ग के लोगों ने भाग लिया। आडसर बास के हनुमान क्लब से प्रारम्भ यह शाही सवारी कस्बे के मुख्य मार्गों से होते हुए कालूबास के नेहरू पार्क पहुंची। कस्बे के लोगों ने जगह-जगह शाही सवारी का पुष्वर्षण करके स्वागत किया। इस दौरान पुलिस जाब्ता पूरी तरह से मुस्तैद रहा।
शाही सवारी का मुख्य आकर्षण: 21 गणगौर और ईशर
श्रीडूंगरगढ़। श्रीडूंगरगढ़ की गणगौर मेला समिति के द्वारा आयोजित गणगौर की शाही सवारी कार्यक्रम में 21 गणगौर तथा 21 ईशरजी लोगों के लिए मुख्य आकर्षण रहा। इसके साथ ही श्रीडूंगरगढ़ का हर एक सनातनी अपने इस पारंपरिक धार्मिक कार्यक्रम से जुड़कर आह्लादित नजर आ रहा था। पंडित देवीलाल उपाध्याय ने बताया कि शनिवार को गणगौर और ईशर जी के फेरे करवाए जाएंगे और इसमें सबसे ज्यादा सजी धजी गणगौर को चयन कमेटी द्वारा चयनित होने पर पुरस्कृत किया जाएगा। घरों में बने ढोकले और लगाया गया गौरमाता को चूरमे का भोग।
श्रीडूंगरगढ़। गणगौर की तीज पर कस्बे सहित क्षेत्र के घरों में ढोकले बनाए गए और महिलाओं ने ढोकले का शक्कर व घी के साथ चूरमा बनाकर गणगौर को भोग लगाया और पानी पिलाया।




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